Prayagraj News : एएमए में आयोजित कांफ्रेंस में हिस्सा लेते चिकित्सक।
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उन्होंने चिकित्सकों को भी सलाह दी कि वह इस तरह के लक्षण वाले रोगियों के प्रति संवेदनशील रहें। ऐसे मधुमेह रोगी को चिह्नित करने के बाद उसे जब भी चिकित्सक बुलाएं, तब काउंसलिंग जरूर करें। मधुमेह रोगियों की लगातार काउंसलिंग की जानी चाहिए। कई बार देखा जाता है कि चिकित्सक मधुमेह की जो दवा दे रहे हैं, उससे ब्लड शुगर बढ़ जा रहा है। ऐसी दवा हरगिज मधुमेह रोगी को न दी जाए। उन्होंने मधुमेह से दिमाग पर पड़ने वाले असर पर विशेष जानकारी दी। उनका कहना था कि मधुमेह दिमाग को कमजोर बना देता है। इसी वजह से स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है। ऐसे में दिमाग को हमेशा सक्रिय बनाए रखना चाहिए।
मित्रों, परिवार के सदस्यों से व्हाट्स एप पर लगातार संदेशों का आदान -प्रदान करने के साथ ही योग, ध्यान गहरी सांस लेने के साथ ही योग निद्रा को अपनाना चाहिए। ताकि, दिमाग को सक्रिय रखा जा सके। इससे पहले मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसपी सिंह, एमएलसी डॉ केपी सिंह समेत कई चिकित्सकों ने दीप जलाकर अधिवेशन का शुभारंभ किया। पहले दिन डॉ. एके सिंह, डॉ. अरुण केडिया, डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव, डॉ. एल श्रीनिवास मूर्ति और डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने मधुमेह पर अपने अनुभवों को साझा किया।