प्रयागराज को किसी जमाने में पूरब का ऑक्सफोर्ड भले ही कहा जाता रहा हो लेकिन तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी इस शहर की पहचान अब देश के अव्वल शहरों में होने लगी है। इसका पूरा श्रेय यहां से तीन बार सांसद रहे एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी को ही जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में डा. जोशी ने प्रयागराज (पूर्ववर्ती इलाहाबाद) को काफी कुछ दिया। यमुना पर बना केबिल ब्रिज भी डा. जोशी की प्रयागराज को एक बड़ी देन है। मंगलवार को ही डा. जोशी का 87 वां जन्मदिन है। यूं तो अब उन्होंने अपना टैगोर टाउन में बना बंगला ‘अंगीरस’ वर्ष 2019 में बेच दिया है, लेकिन प्रयागराज को उन्होंने जो सौगातें दी उसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता है।
मुरली मनोहर जोशी
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डा. जोशी प्रयागराज से लगातार तीन बार वर्ष 1996, 1998 एवं 1999 में सांसद रहे। पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में वह मानव संसाधन विकास मंत्री के पद पर रहे। इसी दौरान उन्होंने प्रयागराज को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जिसे ट्रिपलआईटी भी कहा जाता है उसकी सौगात प्रयागराज वालों को दी।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं डा. जोशी के करीबी राघवेंद्र मिश्र बताते हैं कि मोती लाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कालेज को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा भी डा. जोशी ने ही दिलाया। इसी वजह से इस संस्थान को अब मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कहा जाने लगा है।
मुरली मनोहर जोशी
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इसके पूर्व डा. जोशी ने 1991 में झूंसी में भू-चुम्बकत्व केंद्र की आधारशिला रखवाई। राघवेंद्र मिश्र बताते हैं कि पहले ट्रिपल आईटी लखनऊ के लिए स्वीकृत हुआ था, लेकिन डा. जोशी ने तब पीएम अटल बिहारी से उसे प्रयागराज में खोले जाने का आग्रह कर दिया। पूर्व पीएम ने उनकी बात नहीं टाली और प्रयागराज में ट्रिपल आईटी स्थापित हो गया।
naini bridge
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यमुनापार जाने वालों को दिलाई जाम से निजात
डा. जोशी अपने कैबिनेट मंत्री के कार्यकाल के दौरान पुराने यमुना पुल पर लगने वाले जाम को देखते हुए यमुना पर नए केबिल ब्रिज की स्वीकृति दिलाई। उनके करीबी बृजेश गुप्ता ने बताया कि समय रहते इस पुल का निर्माण भी उन्होंने अपने कार्यकाल में ही करवा दिया। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करवाने के साथ इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा दिलवाने में भी उनकी भूमिका रही।
नैनी स्थित एग्रीकल्चर संस्थान( अब शुआट्स) को उन्होंने ने ही डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलवाया। साइंस सिटी का प्रोजेक्ट भी उन्होंने स्वीकृत करवाया, लेकिन वर्ष 2004 में सपा के रेवती रमण सिंह से चुनाव हारने के बाद यह प्रोजेक्ट बाद में हैदराबाद शिफ्ट हो गया। भाजपा नेता रविंद्र मिश्र ने बताया कि लोकनाथ स्थित भारती भवन पुस्तकालय का कायाकल्प भी डा. जोशी की वजह से हुआ।