भारी मन से अपनों को अलविदा करने आए डा. जोशी
0 लंबे समय पत्नी तरला जोशी के साथ प्रयागराज पहुंचे डा. मुरली मनोहर जोशी
0 एक दो रोज में अपना बंगले ‘अंगीरस’ को बेच सकते हैं डा. जोशी
प्रयागराज। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी लंबे समय के बाद सोमवार को प्रयागराज पहुंचे। अपनी पत्नी तरला जोशी के साथ प्रयागराज पहुंचे डा. जोशी का एयरपोर्ट एवं टैगोर टाउन स्थित उनके बंगले पर भाजपा नेताओं एवं पदाधिकारियों ने स्वागत किया। बताया जा रहा है कि डा. जोशी अपने बंगले ‘अंगीरस’ को बेचने के लिए ही यहां आए हैं। एक दो रोज में उनके बंगले की रजिस्ट्री हो सकती है। डा. जोशी अपना बंगला किसे बेच रहे हैं इसकी जानकारी उनके करीबी नेताओं को ही है, लेकिन उन करीबियों ने भी इस संबंध में चुप्पी साध ली है।
दिल्ली से इंडिगो की फ्लाइट से प्रयागराज एयरपोर्ट पहुंचे डा. जोशी और उनकी पत्नी की अगुवाई एयरपोर्ट में उनके करीबी रहे पूर्व जिलाध्यक्ष राघवेंद्र मिश्र और यमुनापार जिलाध्यक्ष शिवदत्त पटेल ने की। एयरपोर्ट से सीधे डा. जोशी टैगोर टाउन पहुंचे। यहां नगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता, शशि वार्ष्णेय, डा. एलएस ओझा, व्रतशील शर्मा, देवेंद्र नाथ मिश्र, मृत्युंजय तिवारी आदि ने उनका स्वागत किया। डा. जोशी बमुश्किल पांच मिनट ही अपने पोर्टिकों में उनसे मिलने आए नेताआें से मिले। इसके बाद सभी का धन्यवाद करके वे अंदर चले गए। इस बीच गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के पदाधिकारी शिव कुमार वैश्य ने कहा कि डाक्टर साहब प्रयागराज में अब आप कम आ रहे हैं। यहां आते रहा कीजिए। डा. जोशी ने उनकी बात तो सुनी लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। इस दौरान पोर्टिको में खड़ी लाल रंग की अपनी पुरानी एनई कार को भी डा. जोशी ने निहारा। उनसे बाहर मिलने के लिए आए भाजपाइयों में इस बात की चर्चा रही कि डा. जोशी अपना यह बंगला बेचने के लिए ही यहां आए हुए हैं। एक चिकित्सक से इसकी बातचीत फाइनल हुई है। एक दो रोज में बंगले की रजिस्ट्री भी हो जाएगी। इसके बाद डा. जोशी दिल्ली चले जाएंगे। भाजपा नेता देवेंद्र नाथ मिश्र से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बंगला बेचे जाने की चर्चा वे पिछले कई दिनों से सुन रहे हैं लेकिन उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
डा. जोशी ने सहेजी अपनी किताबें
0 प्रयागराज आने के बाद डा. जोशी दिन भर अपने बंगले में ही रहे। इस दौरान उन्होंने अपने घर की लाइब्रेरी में रखी कुछ पुस्तकों को देखा और उन्हें सहेज कर रख लिया। कुछ पुस्तकें ऐसी रही जो उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बतौर शिक्षक होते हुए लिखी थी। इस बीच वे कुछ चुनिंदा लोगों से मिले।