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हाईकोर्ट : पति-पत्नी के समझौते पर दहेज उत्पीड़न केस की कार्यवाही रद्द

Thu, 08 Oct 2026 04:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर करीब 13 साल पुराने दहेज उत्पीड़न के आपराधिक मामले की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर करीब 13 साल पुराने दहेज उत्पीड़न के आपराधिक मामले की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने सुनील गुप्ता व अन्य की ओर से दाखिल आवेदनों पर यह आदेश दिया। सुनील गुप्ता और सोनाली गुप्ता का विवाह 20 नवंबर 2003 को हुआ था। विवाद के बाद पत्नी ने दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए कानपुर नगर के जूही थाने से एफआईआर दर्ज कराई थी।

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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कानपुर नगर ने पति, उसकी मां, भाई, भाभी, बहन और बहनोई को समन जारी कर तलब किया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर पति-पत्नी ने 22 सितंबर को अधीनस्थ अदालत में उपस्थित होकर समझौते का सत्यापन कराया। दोनों ने कहा कि समझौता स्वेच्छा से हुआ है और वे मुकदमा आगे नहीं चलाना चाहते। हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकारों ने आपसी सहमति से वैवाहिक विवाद सुलझा लिया है और समझौता न्यायालय से सत्यापित भी हो चुका है। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं रह जाता।

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गवाहों के बयान में विरोधाभास मिलने पर कोर्ट ने आरोपी को बरी किया

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के लालकुर्ती थाने में 2015 में दर्ज पाक्सो और छेड़छाड़ के मामले में आरोपी जोनी को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने ट्रायल कोर्ट के 31 मार्च 2026 के दोषसिद्धि आदेश को रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप साबित करने में विफल रहा।

कोर्ट ने पाया कि अभियोजन की गवाहियों में गंभीर विरोधाभास हैं। शिकायत और पीड़िता के बयान में घटना का समय शाम चार बजे बताया गया, जबकि पिता ने जिरह में दोपहर 2 से 2:30 बजे का समय बताया। पीड़िता ने भी कहा कि घटना वाले दिन आरोपी ने कोई अश्लील हरकत नहीं की थी। विवेचक ने स्वतंत्र गवाहों के बयान भी नहीं लिए। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला साक्ष्यों के विपरीत है। आरोपी के जमानत बंधपत्र व जमानतदार मुक्त कर दिए गए। 
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