कोरांव महोत्सव के दूसरे दिन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन की शुरुआत कवयित्री प्रीति पांडेय ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद संजय सांवरा ने प्रेम के गांव में आता जाता रहूं, प्यार की धुन को मैं गुनगुनाता रहूं...पेशकर लोगों का मन मोहा।
कवि सुशील शुक्ल हर्ष ने दरबार लगा था रावण का, नतमस्तक हर दरबारी था, रघुनंदन का बस एक दूत सब पर भारी था...सुनाया। अमित शुक्ला ने अपने हास्य से लोगों को खूब गुदगुदाया। प्रशांत बजरंगी ने कहा कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई... मत देखो का संदेश दिया।
कवि गजलकार कृष्णकांत कामिल ने उधर गुलाब, इधर है फूल चमेली का, मुझको तमाम उम्र संभालेंगे आप लोग...पेश किया। विपिन त्रिपाठी ने साधु-संतों की महिमा बनी रहे, गंगा जमुना का पानी रवानी रहे...सुनाए।
इसी तरह अजय प्रधान, बबलू सिंह बहियारी, नीरज इलाहाबादी, मुन्ना मासूम नेवी ने अपने रचनाओं से लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। अध्यक्षता पंडित कृष्ण देव मिश्र और संचालन मशहूर कवि अशोक बेशरम ने किया।
इस दौरान मुख्य अतिथि भाजपा नेता नीरज त्रिपाठी ने कहा कि कोरांव की पहचान कोरांव महोत्सव है। विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख मुकेश कोल ने संस्थापक संयोजक कृष्ण मुरारी द्विवेदी, शशि द्विवेदी के इस पहल की सराहना की। मौके पर रामेश्वर द्विवेदी, अपर शासकीय अधिवक्ता अनिल मिश्रा, अवध नारायण तिवारी, गणेश शंकर तिवारी, राजेश त्रिपाठी, मुन्ना सिंह आदि मौजूद रहे।