बाढ़ आपदा है। रोमांचकारी पर्यटन का अवसर नहींं। उन लोगों के बारे में सोचिए जिनके आशियाने उजड़ गए। खुद भी सतर्क रहें और बच्चों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाने रोकें। उल्दा गांव में रविवार को साथियों संग बाढ़ देखने गया किशोर सड़क पर बहते हुए पानी में उतरा तो फिसलकर नाले में समा गया। इससे उसकी मौत हो गई।
इन दिनों प्रयागराज मंडल के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। स्कूटर और कार से लोग बाढ़ देखने जा रहे हैं। किशोर और युवा पानी का मजा ले रहे हैं। सेल्फी ले रहे हैं। यह खतरनाक हो सकता है। मंसूराबाद कोतवाली क्षेत्र के उल्दा गांव निवासी पप्पू गौतम का छोटा बेटा शनि (16) गांव के ही इंटर कॉलेज में कक्षा 11 का छात्र था। रविवार की दोपहर वह साथी हरिकेश, सुनील व रवि के साथ गंगा की बाढ़ देखने चला गया।
बताया जाता है कि गांव तक पहुंचे बाढ़ के पानी में डूबी सड़क पर चारों युवक एक साथ चल रहे थे। शनि सबसे आगे था। अचानक वह गहरे नाले में चला गया। तीनों साथियों ने बाहर आकर बाढ़ देख रही भीड़ के बीच गुहार लगाई। काफी देर तक कोई मदद नहीं मिल पाई।
सूचना पर पहुंचे विधायक गुरु प्रसाद मौर्य ने एसडीएम एवं एसीपी को सूचित कर गोताखोरों को बुलाया। घंटों मशक्कत के बाद पीएसी के गोताखोरों ने शाम करीब साढ़े छह बजे शनि के शव को निकाला। इसके बाद गांव में आंसुओं की बाढ़ आ गई। संवाद
बाढ़ के पानी में डूब रहे छात्र को नाविकों ने बचाया
कंजासा गांव के राहुल निषाद का बेटा शनि (9) गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन का छात्र है। शनिवार को वह खेल कर लौट रहा था। उसके घर के रास्ते में घुटने भर बाढ़ का पानी भरा था। बाढ़ के चलते रास्ता बीच से कट गया था और वहां गहरा गड्ढा बन गया था। पैर फिसलने से वह गड्ढे में गिर गया। गनीमत थी कि पास ही कई नाविक मौजूद थे। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए डूब रहे छात्र को सकुशल बाहर निकाल लिया। परिजन इलाज के लिए तुरंत पास के अस्पताल में ले गए। हालत नाजुक देखते हुए डाक्टरों ने उसे प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।