आजकल मरीज अपने एक्सरे व एमआरआई की तस्वीरें खींचकर एआई में डाल रहे हैं। वे इसका मतलब खुद समझने की कोशिश करते हैं, जो कि खतरनाक हो सकता है। एआई मेडिकल रिपोर्ट की बारीकियों और मरीज की शारीरिक स्थिति को देखे बिना सटीक परिणाम नहीं दे सकता। यह प्रवृत्ति मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। - डॉ. सचिन यादव, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।
एआई से जानकारी लेना गलत नहीं है, लेकिन चिकित्सक को बिना दिखाए उन बातों पर यकीन करना खतरनाक हो सकता हैं। मरीज को चाहिए कि वह बिना डॉक्टर को दिखाए कोई दवा न लें। - डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, वरिष्ठ जनरल फिजीशियन, एसआरएन अस्पताल।
अधिकांश युवा सीने में दर्द होने पर एआई से पूछकर इलाज शुरू कर देते हैं। यह एक बड़ा जोखिम है। इसके अलावा वह डॉक्टर के पर्चे को एआई पर डालकर 50 तरह के सवाल पूछते हैं। जिसकी वजह से डॉक्टर को उपचार करने में परेशानी होती है। - डॉ. अभिषेक सचदेवा, हृदय रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल।
डॉक्टर अगर किसी मरीज को दवा लिख रहा है तो उसपर भरोसा करना चाहिए। कई मरीज एआई से बात करके कभी भी दवा बंद कर देते हैं। इन्सुलिन लेने से कतराते हैं, वहीं जब हालत बिगड़ जाती है, तो डॉक्टर के पास आते हैं। - डॉ. विभु रंजन खरे, मधुमेह रोग विशेषज्ञ, एसआरएन अस्पताल
अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार एआई से जानकारी लेकर खुद निर्णय कर लेते हैं। मरीज की कौन सी जांच होनी है, क्या दवा चलेगी, ऑक्सीजन की आवश्यकता है कि नहीं व वेंटिलेटर पर मरीज को रखना है कि नहीं, उन्हें समझना चाहिए कि एआई सुझाव दे सकता है, मगर उपचार डॉक्टर ही करेगा। - डॉ. वैशाली सिंह, प्रमुख अधीक्षक, छावनी सामान्य