डॉक्टरों ने फूंकी एनएमसी बिल की प्रतियां
एएमए सदस्यों ने नेशनल मेडिकल कमीशन को बताया काला कानून
वक्ताओं ने कहा, गरीब छात्रों को एमबीबीएस करने से रोकने की साजिश
प्रयागराज। चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों ने बृहस्पतिवार शाम नेशनल कमीशन बिल को काला कानून बताते हुए एनएमसी बिल की प्रतियां फूंकीं। एएमए सभागार के बाहर जुटे सदस्यों और मेडिकल छात्रों ने अपना विरोध जताया। इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने बिल को काला कानून करार दिया।
आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे डॉ. अशोक अग्रवाल ने इस मौके पर हुई सभा में बिल से होने वाली दिक्कतें बताईं। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की राष्ट्रीय इमरजेंसी एक्शन कमेटी के निर्देश पर यह विरोध प्रदर्शन देश की सभी 1700 शाखाओं ने किया गया। उन्होंने बताया कि 1956 में मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया की स्थापना की गई थी। जिसका काम मेडिकल एजुकेशन और प्रैक्टिस की गुणवत्ता को नियंत्रण में रखना था। अब नियमों के विपरीत मनमानी से बनाया गया नया बिल उत्पीड़न का कारण बनेगा।
एएमए अध्यक्ष डॉ. आरकेएस चौहान ने कहा कि यह जनविरोधी बिल है। इसे निर्वाचित नहीं 80 फीसदी नामित सदस्य संचालित करेंगे। यह बिल चिकित्सकों को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आईएमए की मांग है कि कमीशन में कम से कम 70 फीसदी सदस्य निर्वाचित हों, जिससे जनता के हितों की रक्षा की जा सके। चिकित्सकों को बताया गया कि 29 जुलाई को दिल्ली में इसके खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें शामिल होने से यहां से सौ से अधिक चिकित्सक जाएंगे।
सचिव डॉ. राजेश मौर्य ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन को 52 प्रतिशत सीटें देकर गरीब छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई से वंचित किए जाने की साजिश है। जबकि वर्तमान में सिर्फ 15 प्रतिशत सीटें ही प्रबंधन को दी गई हैं। ऐसे में मेडिकल की सीटों को किसी भी बेचने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। एएमए इसका विरोध करता है।
विरोध प्रदर्शन में डॉ. आशुतोष गुप्ता, डॉ. अनूप चौहान, डॉ. बृजभान समेत अन्य चिकित्सक और मेडिकल छात्र मौजूद रहे।