एडीएम सिटी ने इस मामले में लिपिक लक्ष्मी शंकर को क्लीन चिट दे दी। एडीएम सिटी की इस रिपोर्ट पर डीएम ने दोबारा मुख्य राजस्व अधिकारी कुंवर पंकज से भी राय मांगी। तब सीआरओ ने भी एडीएम सिटी की जांच रिपोर्ट पर अपनी सहमति जता दी। इसके बाद इस फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस मामले में लिपिक का सहायक बृजपाल फरार है।
अमर उजाला की ओर से एडीजी की रिपोर्ट का खुलासा किए जाने के बाद डीएम ने परीक्षा माफिया के साथ संलिप्त पाए गए लिपिक लक्ष्मीशंकर को हटाकर मेजा तहसील भेज दिया। इसके साथ ही एडीएम सिटी के भी कई महत्वपूर्ण अधिकार छीन लिए। इनमें नजारत, शस्त्र अनुभाग, न्यायिक अभिलेखालय, शस्त्र लाइसेंसों का नवीनीकरण, आवास आवंटन समेत कई अहम अधिकार शामिल हैं। हालांकि एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार की रिपोर्ट में लिपिक लक्ष्मी शंकर और उसके सहायक बृजपाल को गैर जनपद स्थानांतरित करने के लिए कहा गया है।
अब नए सिरे से होगी जांच
परीक्षा माफिया से एडीएम सिटी कार्यालय के लिपिक की संलिप्तता मामले की अब नए सिरे से जांच कराई जाएगी। डीएम संजय कुमार खत्री ने इसके संकेत दिए हैं। नए जांच अधिकारी को मंगलवार को नामित किया जा सकता है। माना जा रहा है कि अगर गहराई से जांच की गई तो प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल की जड़ों को लेकर कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
एडीजी की रिपोर्ट के चार माह बाद तक परीक्षा पटल पर बना रहा लिपिक लक्ष्मीशंकर
एडीजी कानून व्यवस्था की रिपोर्ट के बाद चार महीने तक प्रतियोगी परीक्षाओं का पटल देखने वाले लिपिक लक्ष्मीशंकर यादव को न हटाया जाना भी सवालों के घेरे में है। इस दौरान वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं का केंद्र निर्धारण कराने, कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी तय कराने समेत परीक्षाओं से जुड़े अन्य गोपनीय कार्य कराता रहा है। हालांकि डीएम का कहना है कि एडीजी की 16 सितंबर 2022 की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित लिपिक को उन्होंने प्रतिकूल प्रविष्टि पहले ही दे दी थी। लिपिक को रविवार को प्रतियोगी परीक्षाओं के पटल से हटाया गया।