लोक सेवा आयोग के मुद्दे को लेकर आवास के सामने सांसदों के प्रदर्शन और धरने के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में डीएम कितना सफल हो सकेंगे, यह वक्त बताएगा लेकिन सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने डीएम के ‘नहले’ पर ‘दहला’ चल दिया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर डीएम के खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन में कार्रवाई की मांग उठाई है। सांसद ने तर्क दिया है कि डीएम सांसद आदर्श ग्राम योजना के प्रति गंभीर नहीं हैं। योजना के लिए होने वाली बैठकों से भी वह नहीं आते।
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में सांसद ने आरोप लगाया है कि 15 अप्रैल को जैतवार डीह सांसद आदर्श ग्राम योजना से जुड़ी बैठक के लिए कई बार बुलाने के बाद भी डीएम नहीं आए। 19 नवंबर 2014 को वह कई जरूरी कार्यक्रम निरस्त कर सांसद आदर्श ग्राम योजना की बैठक से पहुंचे लेकिन डीएम अनुपस्थित रहे। सांसद ने आशंका जताई है कि भारत सरकार के निर्देश के बाद भी डीएम योजना के प्रति गंभीर नहीं हैं। सांसद ने कहा है कि उन्होंने डीएम से चार जानकारियां मांगीं, वह भी उन्होंने नहीं दीं।
इसमें पहली, बैठकों में न आने का कारण है। दूसरा, आदर्श ग्राम के विकास एवं सांसद को प्राप्त अधिकारों के अनुसार निर्वाचन के एक वर्ष बाद भी सांसद कार्यालय की जानकारी और क्षेत्र भ्रमण के लिए वाहन क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया। तीसरा, जनहित जुड़े पत्रों के बारे में कोई जवाब नहीं मिला। चौथा, सरकारी फोन और मोबाइल पर सैकड़ों बार जनहित की समस्याओं को लेकर बात करने की कोशिश की लेकिन फोन नहीं उठा। न ही बाद में फोन किया गया, इसका क्या कारण है? सांसद ने यह पत्र 16 अप्रैल को लिखा है।