फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : डीएम गाजीपुर 5 सप्ताह में कारण सहित आदेश करें पारित, सांसद अफजाल की पत्नी के कुर्क मकान का मामला

Wed, 04 Feb 2026 07:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए डीएम गाजीपुर को पांच हफ्ते में कारण सहित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। 
विज्ञापन
अफजाल अंसारी, सपा सांसद गाजीपुर। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए डीएम गाजीपुर को पांच हफ्ते में कारण सहित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क मकान को लेकर जारी हुआ है। दरअसल 2022 में अफजाल अंसारी की पत्नी के लखनऊ स्थित मकान को 2022 में कुर्क किया गया था। जिसको खोलने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था, आदेश के बावजूद न खोले जाने को फरहत ने चुनौती दी थी।

विज्ञापन


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के भाई और गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की एक याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। कोर्ट ने डीएम गाजीपुर को पांच हफ्ते के भीतर सकारण आदेश पारित करने का निर्देश देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया। याचिका में फरहत अंसारी ने लखनऊ स्थित अपने आवासीय मकान को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क किए जाने के खिलाफ गाजीपुर जिला प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी थी। अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने फरहत की तरफ से पक्ष रखा। मामले की सुनवाई जस्टिस सीडी सिंह की एकल पीठ ने की। 

विज्ञापन

कोर्ट ने माना- गैंगस्टर से अर्जित संपत्ति नहीं

गाजीपुर की गैंगस्टर कोर्ट ने सात अप्रैल 2025 को आदेश दिया था कि लखनऊ का यह आवासीय मकान गैंगस्टर से अर्जित संपत्ति नहीं माना जाता है। कोर्ट ने डीएम गाजीपुर को 30 दिनों के अंदर मकान को खोलने का खोलवाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बावजूद डीएम गाजीपुर ने मकान को नहीं खुलवाया। जिसके चलते फरहत अंसारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

गाजीपुर डीएम ने 23 अक्तूबर 2022 को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत इस लखनऊ स्थित मकान को कुर्क किया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि गैंगस्टर कोर्ट के फैसले के बाद भी प्रशासन द्वारा आदेश की अवहेलना की जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें