बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके ओझा का कहना था, श्मशान घाट से रिपोर्ट मंगा ली जाए तो पता चल जाएगा कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। आंकड़ा मिल जायेगा। इस पर कोर्ट ने कहा, शासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा। उठाए गए कदमों की अपेक्षा ग्राउंड रियलिटी अलग है। डाटा नहीं ग्राउंड रियलिटी देखें। डेंगू से सात वकीलों की मौत हो चुकी है जबकि 100 वकील बीमार हैं। जजों की कॉलोनियों सहित पाश इलाके में फॉगिंग नहीं की गई है।
वहीं याची के अधिवक्ता ने कहा, नगर निगम जाड़े का इंतजार कर रहा कि शायद जाड़े में डेंगू का प्रकोप खत्म हो जाय। फॉगिंग नहीं कराई जा रही है। इस पर निगम के अधिवक्ता ने कहा, जनता का सहयोग नहीं मिल रहा। उठाए गए कदमों से असंतुष्ट कोर्ट ने शुक्रवार को संबंधित अधिकारी को हाजिर रहने का आदेश दिया। सुनवाई चार नवंबर को होगी। कहा, निगम की ड्यूटी है कि वह नगर को साफ -सुथरा रखे। टेस्टिंग नहीं प्रिवेंटिव उपाय चाहिए।