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diwali 2022 : दीपावली आज, शुभ समृद्धि और सौभाग्य के लिए करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा

Mon, 24 Oct 2022 12:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अमावस्या के आरंभ काल से 5:18 बजे तक द्विस्वभावीय मीन लग्न रहेगा। कारोबारियों के लिए पूजा- अर्चना का यह समय सर्वोत्तम रहेगा। ज्योतिषाचार्य अमिताभ गौड़ के मुताबिक सामान्य परिस्थिति में हर किसी के लिए पूजा का मुहूर्त स्थिर वृष लग्न में शाम 6:55 से रात 8:51 तक रहेगा।
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Prayagraj News : दिवाली की पूर्व संध्या पर फुलझड़ी जलातीं युवतियां। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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ज्योति पर्व दीपावली पर सोमवार को शुभ, समृद्धि और सौभाग्य के लिए महालक्ष्मी और रिद्धि-सिद्धि के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। सोमवार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या शाम 5:04 बजे लग जाएगी। अमावस्या के आरंभ काल से 5:18 बजे तक द्विस्वभावीय मीन लग्न रहेगा। कारोबारियों के लिए पूजा- अर्चना का यह समय सर्वोत्तम रहेगा। ज्योतिषाचार्य अमिताभ गौड़ के मुताबिक सामान्य परिस्थिति में हर किसी के लिए पूजा का मुहूर्त स्थिर वृष लग्न में शाम 6:55 से रात 8:51 तक रहेगा। इस मुहूर्त में की गई पूजा मां लक्ष्मी की कृपा के लिए फलदायी रहेगी। विशेष पूजा का समय रात 1:23 से सुबह 3:37 बजे तक रहेगा।

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लक्ष्मी-गणेश पूजा का मुहूर्त:

- शाम 5:04 से 5:18 बजे तक मीन लग्न में 

-शाम 6:55 से रात 8:51 बजे तक स्थिर वृष लग्न में

महानिशा पूजा

रात 1:23 से भोर में 3:37 बजे तक। 
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झिलमिल तारों की मानिंद झालरों से सजा संगम का शहर

पंच दीपोत्सव की खुशियां रविवार को संगम के शहर में छा गईं। चाहे सिविल लाइंस हो या फिर पुराने शहर का चौक, ठठेरीबाजार, चौक और कटरा के इलाके, हर तरफ ऊंची इमारतों से लेकर टॉवरों, बिजली के खंभों तक को रंग-बिरंगी झालरों से मोहक ढंग से सजा दिया गया। खुशियों की हिलोरों के बीच फुलझड़ियां छूटने लगीं। इसी के साथ सोमवार को ज्योति पर्व दिवाली की सतरंगी छटा संगम से लेकर शहर तक छा जाएगी।


छोटी दिवाली पर सांझ ढलते ही घर-घर से दीये निकाले जाने लगे। चौमुखी दीपों से यम के नाम पर ज्योति जलाई गई। इसी के साथ पूरा शहर रंग-बिरंगी लतरों की टिमटिमाहट से जगमगाने लगा। चौराहों पर झालरों की छटा बिखर गई। सिविल लाइंस में प्रतिष्ठानों की प्रकाश सज्जा देखते बनी। सुभाष चौराहे से लेकर इंदिरा भवन होते हुए पत्थर गिरजा घर के बीच के बाजार की चकाचौैंध हर किसी का ध्यान खींचती रही। इसी तरह पुराने शहर में भी घर-घर को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया। बच्चे आतिशबाजी में जुट गए। छतों, सड़कों की पटरियों पर आतिशबाजी की इंद्रधनुषी छटा बिखर गई।
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