Prayagraj News : बुधवार को फुलझड़ी जलाकर छोटी दिवाली मनाता परिवार।
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कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर बृहस्पतिवार को लक्ष्मी-गणेश और इंद्र-कुबेर की पूजा-आराधना की जाएगी। जहां गृहस्थ तथा कारोबारी मुहूर्त और राशि के अनुसार दीपपर्व मनाएंगे, वहीं तांत्रिक विधि-विधान से साधना करेंगे। अमावस्या तिथि चार नवंबर की भोर में 5.31 बजे से आरंभ होकर रात में 03.32 बजे तक रहेगी। अमावस्या पर प्रदोष काल में अतिउत्तम योग मिल रहा है। सुबह 8.12 बजे तक चित्रा नक्षत्र, जबकि रात तक स्वाति नक्षत्र रहेगा। वहीं दिन में 12.42 बजे तक प्रीति योग, फिर आयुष्मान योग रहेगा।
ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली’ के मुताबिक दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में मनेगी। प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों और महानिशीथ काल का महत्व तांत्रिकों के लिए उपयुक्त है। लक्ष्मी पूजन को ‘श्रीं’ या ‘ऊं श्री महालक्ष्म्यै नम:’ मंत्र का जाप फलदायी रहेगा। पूरी रात लक्ष्मी के दोनों ओर एक-एक दीप जलाकर उसे अन्य दीये से ऐसे ढंकें ताकि काजल उतर आए। यही काजल सुबह लगाना चाहिए।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए
स्थिर कुंभ लग्न में चौघड़िया के साथ पूजन में दिन में 1.14 बजे से 2.46 बजे तक
प्रदोष काल स्थिर वृष लग्न में चौघड़िया संग पूजन शाम 5.52 बजे से 7.49 बजे तक
दूसरी स्थिर सिंह लग्न में चौघड़िया के साथ पूजन रात 11.49 से 1.30 बजे तक