प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सहायक उपकरण वितरित किए जाने तथा विश्व रिकार्ड को लेकर दिव्यांगों में उत्साह है लेकिन, सम्मान एवं हक को लेकर उनमें कसक बाकी है। उनका स्पष्ट कहना है कि यह उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। नौकरियों में आबादी के बराबर भागीदारी के साथ उन्हें राजनीतिक अधिकार भी मिलना चाहिए।
दिव्यांगता को पीछे छोड़कर समाज में अपना मुकाम हासिल करने वाले तथा लाभार्थियों की सूची में शामिल दिव्यांगों का कहना है कि यह समारोह उनके लिए सम्मान की बात है लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री से राज्यसभा में एक दिव्यांग को भेजने की भी मांग की है। उनका कहना है कि दिव्यांग या उनके उनके लिए काम करने वाले किसी समाजसेवी को एक बार राज्यसभा में भेजा जाए। ताकि, उनके मुद़दों को भी संसद में स्थान मिले। दिव्यांग नाज और माता प्रसाद का कहना है कि पहले सात प्रकार के लोग दिव्यांगता की श्रेणी में आते थे।
अब इसका विस्तार हो गया है और इसमें 21 तरह की दिव्यंगता को शामिल कर लिया गया है। इससे दिव्यांगों की संख्या सात से आठ प्रतिशत हो गई है। माता प्रसाद ने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार भी छह फीसदी दिव्यांग हैं। वहीं भर्तियों में आरक्षण तीन से बढ़ाकर चार फीसदी किया गया है। दिव्यांगों ने इसे बढ़ाकर छह से सात फीसदी करने की मांग की।
दिव्यांग आरती मिश्रा ने रेलवे में सुविधा कम किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने हर स्तर पर दिव्यांगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की मांग उठाई। वहीं विवेक, राजन ने दिव्यांगों को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण तथा लोन की प्रक्रिया आसान तथा भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात कही। दिव्यांगों का कहना है कि इन मांगों को लेकर वह हर स्तर पर संघर्षरत हैं। इन्हें पूरा किया जाए तो सही मायने में उनकी कठिनाई दूर होगी।