जिला अधिवक्ता संघ इलाहाबाद ने देश को नामी गिरामी वकील ही नहीं दर्जनों न्यायधीशों सहित मुख्य न्यायाधीश भी दिया है। शताब्दी समारोह मना रहे संघ के पास गर्व करने लायक बहुत कुछ है। 1914 में स्थापित संघ के सदस्यों ने न्याय जगत में झंडे गाड़ने सहित आजादी के आंदोलन की कमान भी संभाली है। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएन सिंह ने वकालत की शुरुआत जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य के रूप में की थी। इसी तरह पं मोतीलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पं कन्हैयालाल मिश्र, विमलचंद्र तिवारी जैसे धुरंधर वकील, पूर्व न्यायमूर्तिगण गिरिधर मालवीय, एनएल गांगुली, अंशुमान सिंह, डीएस सिन्हा, पालोक बसु, जनार्दन सहाय, सीएसपी सिंह, एपी सिंह के अतिरिक्त राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी आदि जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य रह चुके हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गोपाल स्वरूप पाठक ने देश के उपराष्ट्रपति का पद भी संभाला। उन्होंने अपना बंगला बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को दान कर दिया जिसमें आज भी कौंसिल का कार्यालय है। संघ से जुड़कर वकालत की शुरुआत करने वाले एनडी ओझा भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद तक पहुंचे। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, पूर्व सॉलीसिटर जनरल ऑफ इंडिया एडी गिरी, पूर्व एटार्नी जनरल मिलन बनर्जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यप्रकाश मालवीय, जनेश्वर मिश्र, आयकर मामलों के धुरंधर वकील भरतजी अग्रवाल भी संघ के सदस्य रहे।
शताब्दी वर्ष पर अधिवक्ता संघ भवन नए रूप में सजा संवरा है। हालांकि इसके बाहरी स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। लाइब्रेरी हॉल आधुनिक रूप में वातानुकूलित हुआ है। संघ के मंत्री देवेंद्र मिश्र नगरहा के मुताबिक अध्यक्ष और मंत्री के नए कक्षों सहित कार्यकारिणी की बैठकों के लिए नया वातानुकूलित हॉल बनाया गया है। संघ के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया भी जारी है।
दो दिनी शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत शनिवार को होगी। प्रदेश के राज्यपाल रामनाइक और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के अतिरिक्त हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डा.डीवाई चंद्रचूड भी समारोह में शामिल होंगे। समारोह की तैयारी में अधिवक्ता संघ के साथ न्यायिक अधिकारी भी पूरी शिद्दत से जुटे हैं। जिला जज डीएस त्रिपाठी स्वयं सभी तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।