डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर एलपीजी का फार्म भरने जा रहे हैं तो संभलें। फार्म के एक-एक लाइन को पढ़कर ही इसे भरें। इसमें थोड़ा भी चूक हुई तो रसोई गैस सब्सिडी हाथ से निकल जाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने नए फार्म में सब्सिडी न लेने के विकल्प का भी कॉलम डाल दिया है। कंपनियों ने डीबीटीएल फार्म का सरलीकरण कर दिया है। चार फार्म की जगह एक फार्म कर दिया गया है। यही फार्म जिनके पास आधार है और जिनके पास आधार नहीं है, सभी को भरना है लेकिन गैस एजेंसियों और बैंक में फार्म सभी को जमा करना होगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने डीबीटीएल योजना शुरू करने पर तीन फार्म जारी किए थे। इसमें दो फार्म आधार कार्ड धारकों और एक फार्म बिना आधार कार्ड धारकों के लिए थे। नए फार्म में सभी के लिए एक ही फार्म कर दिया गया है। सभी ग्राहकों को इसे ही भरना है लेकिन इसमें नया कॉलम भी जोड़ दिया गया है। इसमें विकल्प नंबर तीन पर पूछा गया है कि यदि आप एलपीजी पर सब्सिडी नहीं चाहते हैं तो टिक करें। यह विकल्प देने वालों को बैंक में जाने की जरूरत नहीं है। इसे भरकर केवल एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास भरना होगा। साथ ही फार्म का पार्ट-ए कॉलम भरना होगा। इसमें एलपीजी कंज्यूमर नंबर, 17 डिजिट का एलपीजी आईडी, ग्राहक का नाम और मोबाइल नंबर भरना होगा। साथ ही कैश मेमो या ब्लू बुक या एजेंसी का सर्टिफिकेट देना होगा। कॉलम में टिक करने के बाद यह हिस्सा भरा तो एलपीजी की सब्सिडी से हाथ धोना पड़ सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने नया फार्म जारी तो कर दिया है लेकिन ज्यादातर गैस एजेंसियों पर पुराना फार्म ही मिल रहा है। बताते हैं कि बीपीसीएल ने खुद फार्म छापकर एजेंसियों को दिया है। सभी एजेंसियों को उनकी ग्राहक संख्या के आधार पर फार्म दिए गए हैं। इसके विपरीत आईओसी की एजेंसियों ने खुद फार्म छपवाए हैं। एजेंसी संचालक बताते हैं कि प्रत्येक फार्म की छपाई 75 पैसे पड़ी है। ऐसे में पुराना फार्म फेंकने पर नुकसान होगा। यह फार्म खत्म होने पर ही नए फार्म उपलब्ध हो सकेंगे।