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High Court : जिला अदालतें निषेधाज्ञा अर्जियों का छह माह में निस्तारण करें, ऐसा न होने पर कारण दर्ज करें

Sun, 15 Jun 2025 02:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में अंतरिम निषेधाज्ञा (स्थगन) की अर्जी को लंबे समय तक लंबित रखने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रदेश की सभी अदालतों को ऐसी अर्जियों का निस्तारण छह माह में करने का आदेश दिया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में अंतरिम निषेधाज्ञा (स्थगन) की अर्जी को लंबे समय तक लंबित रखने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रदेश की सभी अदालतों को ऐसी अर्जियों का निस्तारण छह माह में करने का आदेश दिया है। अगर तय समय में निस्तारण नहीं होता तो अदालतों को कारण दर्ज करना होगा।

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यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत ने मथुरा के द्वारकाधीश सेवा ट्रस्ट की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा, इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर 16 अगस्त 2017 में हाईकोर्ट प्रशासन ने परिपत्र जारी किया था। उसमें सभी अधीनस्थ अदालतों को अंतरिम निषेधाज्ञा अर्जियों को छह माह में अनिवार्य रूप से निस्तारित करने का आदेश दिया था, लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो रहा।

याची संस्था और कृष्ण कन्हैया विवेक बजाज के बीच मथुरा की जिला अदालत में सिविल वाद लंबित है। इसमें याची की ओर से अंतरिम राहत के लिए 2024 में निषेधाज्ञा अर्जी दाखिल की गई है, जो अभी तक लंबित है। इसके शीघ्र निस्तारण का निर्देश दिए जाने की मांग के साथ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि अंतरिम राहत की सख्त जरूरत है, लेकिन अर्जी का निस्तारण टलता जा रहा है। कोर्ट ने 16 अगस्त 2017 में जारी परिपत्र का जिक्र करते हुए याचिका निस्तारित कर कहा कि अधीनस्थ न्यायालय परिपत्र में तय समय में याची की अर्जी का निस्तारण करें।
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निषेधाज्ञा अर्जियों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी है। यदि ऐसा न हो तो कारण लिखित रूप में आदेश में दर्ज किया जाना चाहिए। - इलाहाबाद हाईकोर्ट

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