इसके अलावा वर्ष 2011 के विज्ञापन के तहत जीव विज्ञान विषय में सहायक अध्यापक (टीजीटी) के 60 पदों पर भर्ती के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया भी फंसी हुई है। चयन बोर्ड ने लिखित परीक्षा का परिणाम तो जारी कर दिया था, लेकिन इंटरव्यू नहीं कराया था। मामला कोर्ट में गया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अभ्यर्थियों को इंटरव्यू कराया जाए, लेकिन आयोग में अध्यक्ष सहित सदस्यों के सभी पद खाली हैं। ऐसे में नए आयोग को यह भर्ती भी पूरी करानी होगी।
वहीं, उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से जुड़े कई मामलों का निस्तारण भी नए आयोग के जिम्मे होगा। सबसे पहले तो नए आयोग को विज्ञापन संख्या-51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर लंबित पड़ी भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके अलावा नए आयोग को विज्ञापन संख्या-42 के तहत दस वर्ष से अधिक पुरानी असिस्टेंट प्रोफेसर के बैकलॉग पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी पूरी करानी होगी। इस विज्ञापन के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर चयनित कई अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग मिल चुकी हैं, जबकि 144 पदों के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया फंसी हुई है।
दरअसल, भर्ती प्रक्रिया के दौरान ही मानदेय शिक्षक आरक्षण के मसले पर न्यायालय चले गए थे। बाद में सरकार ने मानदेय शिक्षकों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर विनियमित कर दिया था, जिसके बाद स्टे समाप्त हो गया। अब शेष 144 पदों पर भर्ती के लिए इंटरव्यू होना है। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की ओर से शासन को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी चुकी है, लेकिन यह भर्ती पूरी कराने की जिम्मेदारी नए आयोग पर होगी।
इसके अलावा उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की भर्तियाें में विसंगति को लेकर दर्जन भर से अधिक मुकदमे कोर्ट में लंबित हैं। अब इन मुकदमों का बोझ भी नए शिक्षा सेवा चयन आयोग पर ही होगा। वहीं, आरटीआई के भी दर्जन भर से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें राज्य सूचना आयोग ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग पर जुर्माना कर रखा है। इन मामलों के निस्तारण की जिम्मेदारी भी अब नए आयोग पर होगी।