प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पड़े ३९०० पदों पर भर्ती के लिए प्रतियोगी छात्रों ने सोशल मीडिया पर मुहिम शुरू की है। बड़ी संख्या में छात्रों ने मुख्यमंत्री को ट्वीट कर असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर भर्ती शुरू किए जाने की मांग की है। वहीं, उच्च शिक्षा निदेशालय भी शासन को रिमांडर भेजने की तैयारी कर रहा है।
प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफसर भर्ती के लिए चार साल से कोई विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। पद रिक्त होने के बावजूद भर्ती फंसी हुई है। डेढ़ साल पहले उच्च शिक्षा निदेशालय ने असिस्टेंट प्रोफेसर के ५३४ पदों पर भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को पदों का अधिचायन भेजा था, लेकिन बाद में निदेशालय ने यह अधियाचन वापस ले लिया।
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- फोटो : पेक्सेल्स
उस वक्त निदेशालय की ओर से कहा गया था कि आरक्षण को लेकर नए सिरे से समीक्षा होगी और इसके बाद अधियाचन भेजा जाएगा। निदेशालय ने यह काम पूरा भी नहीं किया था कि इसी बीच इब्ल्यूएस आरक्षण की व्यवस्था लागू कर दी गई और निदेशालय को नए सिरे से सीटों के लिए आरक्षण निर्धारित करना पड़ा।
इस दौरान शासन की ओर से नया आदेश जारी किया गया कि प्रदेश भर के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंंट प्रोफेसर के रिक्त पदों का सत्यापन होगा। इसके लिए प्रत्येक जनपद में डीएम की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित कर दी गई है। प्रदेश भर में असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल ३९०० रिक्त पद चिह्नित किए गए, जिनकी सूची निदेशालय ने शासन को भेज दी।
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- फोटो : social media
सूची लॉक डाउन से पहले भेजी गई थी और निदेशालय को भर्ती के लिए अब तक शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है। प्रतियोगी छात्र अनेश कुमार वर्मा, राघवेंद्र सिंह, डॉ. सौरभ कुमार सिंह समेत तमाम अभ्यर्थियों ने सीएम को ट्वीट कर रिक्त पदों पर भर्ती शुरू किए जाने की मांग की है। इस बाबत छात्रों ने उच्च शिक्षा निदेशक को भी ज्ञापन दिया है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा का कहना है कि निदेशालय की ओर से एक रिमांडर शासन को भेजा जाएगा। भर्ती की अनुमति मिलते ही रिक्त पदों का अधियाचन उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को भेज दिया जाएगा।