इसके बाद वह जीजीआईसी पहुंचे। यहां प्रधानाचार्या डॉ. नीलम मिश्र से स्कूल में शिक्षण व्यवस्था, शिक्षकों की संख्या, छात्राओं की संख्या आदि की जानकारी ली। साथ ही पूछा कि छात्राओं के परिजनों से कैसे संपर्क रखा जाता है। प्रधानाचार्य ने बताया कि हर कक्षा के व्हाट्सएप ग्रुप पर अभिभावक जुड़े हैं। इसके बाद उन्होंने 11बी कक्षा में जाकर छात्राओं से बातचीत की। छात्राओं से पूछा आप क्या बनना चाहते हो। इस पर उन्होंने पूछा कोई डॉक्टर नहीं बनना चाहता? तब छात्राओं ने बताया सर यह गणित की कक्षा है।
इसके बाद बाद महानिदेशक डीआईओएस कार्यालय पहुंचे। यहां हर पटल पर जाकर कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने फाइलों के तत्काल निस्तारण पर जोर दिया। इस दौरान सचिव यूपी बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल, डीडीआर आरएन विश्वकर्मा, डीआईओएस पीएन सिंह आदि उपस्थित रहे।
शिक्षा निदेशालय में पारदर्शी व्यवस्था पर दिया जोर
शिक्षा निदेशालय के हर अनुभाग में गए और फाइलों के रखरखाव की व्यवस्था देखी। इसके बाद अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देशित किया कि विभाग में पारदर्शी व्यवस्था हो। किसी भी काम के लिए शिक्षकों को परेशान न होना पड़े। निर्धारित समय में काम का निपटारा हो। साथ ही इस बात का निर्देश दिया कि काम यहीं पर पूरा हो जाए। बेवजह लखनऊ का चक्कर न लगाना पड़े।
केंद्र निर्धारण में गड़बड़ी मिली तो डीआईओएस होंगे जिम्मेदार
यूपी बोर्ड मुख्यालय के हर अनुभाग का निरीक्षण किया और संतुष्टि जताई। उन्होंने कहा कि यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण में पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जाए। यदि किसी दागी विद्यालय को केंद्र बनाया गया तो संबंधित डीआईओएस पर कार्रवाई की जाएगी।