इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑटिज्म से पीड़ित बेटे की चिकित्सा के मद्देनजर मां के तबादले के मामले में राज्य सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार कर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑटिज्म से पीड़ित बेटे की चिकित्सा के मद्देनजर मां के तबादले के मामले में राज्य सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार कर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की एक पीठ ने मां डॉ. विनीता गुप्ता की याचिका पर दिया।
विज्ञापन
डॉ. विनीता गुप्ता वर्तमान में महाराजगंज के सिंदुरिया स्थित गवर्नमेंट होम्योपैथिक कॉलेज में तैनात हैं। उन्होंने याचिका दाखिल कर प्रयागराज अथवा निकटवर्ती जिले में स्थानांतरण की मांग की थी। उनका कहना था कि उनके बेटे को ऑटिज्म है। उसका उपचार प्रयागराज स्थित चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में चल रहा है।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि बच्चे को 50 प्रतिशत मानसिक दिव्यांगता के साथ यूडीआईडी कार्ड जारी किया गया है। स्थानांतरण नीति-2026 के अनुसार दिव्यांग बच्चे के माता-पिता को ऐसी जगह तैनाती दी जानी चाहिए। जहां बच्चे को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याची एक सप्ताह में नया प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। जिस पर संबंधित अधिकारी तीन सप्ताह में विधिसम्मत निर्णय लें।