इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में फर्जी रिमांड आदेश पेश किए जाने को गंभीर मानते हुए याची के अधिवक्ता समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी जितेंद्र सिंह निरंजन की याचिका पर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में फर्जी रिमांड आदेश पेश किए जाने को गंभीर मानते हुए याची के अधिवक्ता समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी जितेंद्र सिंह निरंजन की याचिका पर दिया।
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याची ने अवैध हिरासत का आरोप लगाते हुए रिहाई की मांग की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष तीन मई 2026 के दो अलग-अलग रिमांड आदेश प्रस्तुत किए गए, जिनमें अंतर मिलने पर कोर्ट ने मूल अभिलेख तलब कर जांच कराई। ललितपुर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश एसी-एसटी) की जांच में सामने आया कि राज्य सरकार की ओर से दाखिल रिमांड आदेश ही वास्तविक था।
वहीं, याचिका के साथ लगाया गया दस्तावेज केवल अहस्ताक्षरित प्रोफार्मा रिमांड शीट थी, जो आदेश के रूप में पेश की गई। जांच रिपोर्ट में याची के अधिवक्ता अनुपम वर्मा पर न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से अनधिकृत रूप से दस्तावेज प्राप्त कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। कोर्ट ने ललितपुर के जिला जज को निर्देश दिया कि संबंधित लोगों के खिलाफ दो सप्ताह में एफआईआर दर्ज कराएं। दोषी कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई करने और एक माह में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। 10 अगस्त को सुनवाई होगी।