इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी और अस्तित्वहीन मदरसों से जुड़े कथित घोटाले के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मदरसा कैफी आजमी शिक्षण संस्थान के प्रबंधक मोहम्मद गालिब खान की याचिका पर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी और अस्तित्वहीन मदरसों से जुड़े कथित घोटाले के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मदरसा कैफी आजमी शिक्षण संस्थान के प्रबंधक मोहम्मद गालिब खान की याचिका पर दिया।
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मामला उत्तर प्रदेश सरकार के नौ जनवरी 2023 के आदेश पर आजमगढ़ में मदरसा पोर्टल पर दर्ज 313 मदरसों की जांच से जुड़ा है। विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट में 219 मदरसे फर्जी या अस्तित्वहीन पाए गए थे। इनमें 39 मदरसों को मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत करीब 62.84 लाख रुपये का केंद्रीय अनुदान मिलने की बात सामने आई, जबकि 180 के संबंध में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
सरकार के निर्देश पर लखनऊ की आर्थिक अपराध शाखा (राज्य सीआईडी) के अधिकारी कुंवर ब्रह्म प्रकाश सिंह ने 16 मार्च 2025 को आजमगढ़ के अहरौला थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि 2010 में संबंधित मदरसे को तहतानिया स्तर तक अस्थायी मान्यता दी गई थी। पोर्टल पर तीन कमरों और एक कार्यालय का उल्लेख था, लेकिन मौके पर मदरसा संचालित नहीं मिला। वहां श्री अंबे मां चंद्रावती देवी शिक्षण संस्थान संचालित पाया गया।
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पोर्टल पर 130 छात्रों का नामांकन दर्शाया गया था, जिसकी भी पुष्टि नहीं हुई। साथ ही मान्यता से संबंधित फाइल भी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी उपलब्ध नहीं करा सके। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि मदरसा पोर्टल पर दर्ज पते पर संस्थान का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है। न वहां कक्षाएं हैं और न ही छात्र। ऐसे में फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी मान्यता प्राप्त मदरसे की साख का उपयोग कर सरकारी अनुदान के अलावा विदेशी स्रोतों सहित अन्य माध्यमों से धन जुटाए जाने की संभावना की भी जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने आदेश की प्रति अपर मुख्य सचिव गृह और आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अहरौला के थानाध्यक्ष को भेजने का आदेश दिया।