जिला विद्यालय निरीक्षक राजकुमार पर शिक्षिकाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने सचिव बेसिक शिक्षा को सौंप दी है। सोमवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट की इसकी जानकारी दी। बताया कि जांच का नतीजा सामने आने पर उसके अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाएगी। नीलेश कुमार मिश्र ने डीआईओएस के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने प्रमुख सचिव को 27 अक्तूबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने कोर्ट को बताया कि प्रमुख सचिव माध्यमिक ने मामले की जांच सचिव बेसिक शिक्षा को सौंपी है। उनकी रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। याची के अधिवक्ता का कहना था कि सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक ने प्रारंभिक जांच की थी। इसमें मामला गंभीर पाया गया। छह शिक्षिकाआें के यौन उत्पीड़न की शिकायत है। कोर्ट ने इससे पूर्व इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थायी अधिवक्ता से पूछा था कि इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आरोपी अधिकारी पर प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई।
पीठ का कहना था कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा विशाखा केस में दी गई गाइड लाइन के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। विभागीय जांच और पुलिस विवेचना में अंतर है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राजकुमार ने इलाहाबाद का बेसिक शिक्षा अधिकारी रहते हुए कई शिक्षिकाओं का यौन उत्पीड़न किया है। इसकी शिकायत एक संगठन की ओर से की गई थी। शिकायत की विभागीय जांच सहायक शिक्षा निदेशक द्वारा की गई। जांच संतोषजनक नहीं होने के कारण डीएम ने जांच रिपोर्ट निरस्त कर दी थी। कोर्ट ने अगली सुनवाई के मौके पर विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया है।