हाईकोर्ट ने बलिया जिले में फर्जी तरीके से नियुक्त किए गए 274 अध्यापकों को बहाल किए जाने तथा फर्जी नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार अधिकारी को बीएसए से डीआईओएस बनाने के मामले में प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। बलिया के शिवसरन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर अध्यापकों की नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़े पर सरकार की लीपापोती को उजागर किया है। याचिका में मांग की गई है कि फर्जी तौर से नियुक्त अध्यापकों को सेवा में वापस लेने का आदेश रद्द किया जाए। याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता आलोक कुमार यादव के मुताबिक बलिया जिले में सहायता प्राप्त इंटर कालेजों में 378 अध्यापकों और गैरशैक्षणिक कर्मचारियों की फर्जी नियुक्तियां की गईं। इसकी शिकायत पर सीबीसीआईडी ने जांच कर 25 जून 2005 को रिपोर्ट दी कि 378 में से 274 नियुक्तियां फर्जी हैं। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने फर्जी नियुक्त किए गए लोगों से वसूली करने का आदेश दिया। मगर कोई वसूली नहीं की गई, उल्टे सभी बर्खास्त लोगों को बहाल कर दिया गया है।
इसी प्रकार से बस्ती जिले में तैनात बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेश सिंह को 570 लोगों की फर्जी नियुक्तियां करने के मामले में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। रमेश सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाख्रिल की तो कोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगा दी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने बर्खास्तगी का आदेश वापस ले लिया और रमेश सिंह को जिला विद्यालय निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति भी दे दी। कोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा कि किस प्रावधान में सरकार ने बर्खास्तगी आदेश वापस लिया है।