ढहाए गए जर्जर भवन में एक मंदिर है। इसमें भगवान शिव और हनुमान की प्राचीन मूर्ति स्थापित है। पूर्व में निगम के इंजीनियर विभाग की टीम ने भवन का भौतिक सत्यापन किया था। इसके बाद अक्तूबर 2021 में मंदिर प्रबंधक राजेंद्र शुक्ला को भवन को गिराने के लिए नोटिस जारी कर दिया था। नोटिस सावित्री शुक्ला ने रिसीव किया।
जर्जर भवनों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई में शनिवार को दारागंज के बक्शीकला इलाके में सौ साल से अधिक पुराने दो मंजिला भवन को नगर निगम ने जमींदोज कर दिया। यह मकान महेंद्र शुक्ल का था, जो दारागंज में काली स्वांग में कई बार काली की भूमिका निभा चुके हैं। कार्रवाई से पूर्व मकान में रहने वाले लोगों को स्वयं भवन ढहाने के लिए निगम की ओर से नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद निगम की टीम ने दो मंजिला जर्जर भवन को चार घंटे में ढहा दिया।
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ढहाए गए जर्जर भवन में एक मंदिर है। इसमें भगवान शिव और हनुमान की प्राचीन मूर्ति स्थापित है। पूर्व में निगम के इंजीनियर विभाग की टीम ने भवन का भौतिक सत्यापन किया था। इसके बाद अक्तूबर 2021 में मंदिर प्रबंधक राजेंद्र शुक्ला को भवन को गिराने के लिए नोटिस जारी कर दिया था। नोटिस सावित्री शुक्ला ने रिसीव किया।
नगर आयुक्त ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र लिख था कि दोनों स्थापित मूर्तियों की प्रतिदिन लोग पूजापाठ करने आते हैं। इसके साथ ही भवन के एक भाग में रविंद्र नाथ शुक्ला, सावित्री शुक्ला परिवार सहित रहते भी हैं। भवन का करीब दस फीसदी भाग गिर चुका है। नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन उक्त जर्जर भवन को खाली नहीं किया जा रहा है। ऐसे में भवन गिराना बेहद जरूरी है। मकान ढहाने का खर्च जर्जर भवन में रहने वालों से वसूला जाएगा।
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मूर्ति हटने के दौरान हुआ विरोध
भवन के एक हिस्से में स्थित मंदिर में भगवान की मूर्तियां रखी गई थीं। भवन को गिराने से पहले निगम कर्मी जब मूर्तियों को हटाने पहुंचे तो लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण विरोध ठंडा पड़ गया। इसके बाद करीब चार घंटे में पूरा मकान ढहा दिया गया।