यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा में नकल रोकने के लिए शासन और कोर्ट की सख्ती का असर होता दिखाई नहीं पड़ा। नकलमंडी के रूप में कुख्यात गाजीपुर, मऊ, बलिया जैसे जिले जो हाईस्कूल परिणाम में टॉप टेन में रहे लेकिन इंटरमीडिएट के परिणाम में फिसड्डी साबित हुए। परीक्षा के दौरान कई जिलों में तो सख्ती बरती गई परंतु कई में नकलमाफिया का कब्जा रहा। इससे हाईस्कूल एवं इंटरमीडिए के परिणाम में काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। इस बार इंटरमीडिएट के परिणाम में मामूली गिरावट दर्ज की गई तो हाईस्कूल का परिणाम तीन फीसदी से अधिक बढ़ गया।
नकल के गढ़ माने जाने वाले जिले गाजीपुर, एटा, मिर्जाप़ुर, कासगंज, हरदोई में इंटरमीडिएट के परिणाम अंतिम पायदान पर रहे। बोर्ड की सख्ती का असर यह रहा कि अबकी बीते वर्ष की अपेक्षा परिणाम आगे नहीं बढ़ सका बल्कि इंटरमीडिएट में गिरावट और हाईस्कूल का परिणाम लगभग तीन फीसदी कम हुआ। जिन जिलों से अधिक फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, पूरी परीक्षा के दौरान नकल का बोलबाला रहा, वहां के नतीजे सामान्य रहे। नकलमंडी के लिए बदनाम जिले प्रदेश की लिस्ट में फिसड्डी साबित हुए।
फर्जी छात्रों को परीक्षा से रोकने में नाकाम माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नकलमाफिया का जाल तोड़ने के लिए मूल्यांकन का डंडा चलाया। सूत्रों की माने तो बदनाम जिलों में जहां बड़े पैमाने पर फर्जी दाखिले और नकल की शिकायत थी, वहां के लिए ‘विशेष मूल्यांकन’ का फार्मूला अपनाया गया। जिन स्कूलों के बारे में बोर्ड के पास शिकायत थी, वहां पांच से दस कापियों के जबाव एक जैसे दिखे तो कॉमन मार्किंग करा दी गई। नतीजा रहा कि गाजीपुर, एटा, मिर्जापुर, कासगंज, हरदोई, मऊ, मुरादाबाद, कौशांबी जैसे बदनाम जिलों के नतीजे काफी खराब रहे।
इस बार जबकि बोर्ड ने दिल खोलकर नंबर लुटाए, नकलमंडी के रूप में कुख्यात जिले प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर रहे। परीक्षा में काफी बदनाम रहा गाजीपुर नीचे से तीसरे यानी प्रदेश में 73वें और कौशांबी 72 वें स्थान पर रहा। बोर्ड के अधिकारी भी मानते हैं कि परीक्षा में सबसे अधिक नकल कौशांबी, गाजीपुर, मथुरा, देवरिया और एटा में हुई। इन जिलों से यह शिकायत भी रही कि नकलमाफियाओं ने बड़े पैमाने पर कापियां बदलवा दीं लेकिन इसके बाद भी वहां के नतीजे औरों के मुकाबले काफी कम रहे।