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35 के हैं तो कराएं मधुमेह की जांच, बचाएं आंख

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Dibeties chekcup - फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। एक आम धारणा रही है कि मधुमेह पीड़ितों में अधिकतर बड़ी उम्र के लोग ही शामिल होते हैं। लेकिन, बदलती जीवन शैली ने इस धारणा को तोड़ दिया है। अब मधुमेह का शिकार होने वालों में 35 से कम उम्र वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रविवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में डायबिटीज एजूकेशन फाउंडेशन की ओर से आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में देश भर से आए वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताते हुए युवाओं को समय-समय पर मधुमेह की जांच कराने की सलाह दी।
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नई दिल्ली से आए पद्मश्री डॉ. अनुल कुमार ने बताया कि अब युवा वर्ग भी तेजी से मधुमेह की चपेट में आ रहा है। इसका कारण अनियमित दिनचर्या और तनाव है। मधुमेह से आंखों के परदे पर खासा प्रभाव पड़ता है। परदे में पानी भर जाता है और खून की छींटे पड़ने से परदा खराब हो जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए समय-समय पर मधुमेह की जांच करानी चाहिए। एम्स दिल्ली के डॉ. दिनेश तलवार ने कहा कि मधुमेह की जांच कराने को उम्र की बाधा नहीं है, लेकिन 35 के हैं तो मधुमेह की जांच जरूर कराएं। उन्होेंने कहा कि मधुमेह पीड़ितों को दृष्टिहीनता की समस्या होने का खतरा बना रहता है। उन्होंने लेजर सर्जरी और मधुमेह से होने वाली आंख की बीमारियों और बचाव के बारे में जानकारी दी।
डॉ. ललित वर्मा ने कहा कि कम खाएं और स्वस्थ रहे। यदि मोटापा है तो मधुमेह से पीड़ित होने की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। उन्होंने मधुमेह रोगियों को सलाह दी कि नियमित अंतराल पर एचबीवनसी जांच अवश्य कराएं। वहीं कोलकाता से आए डॉ. पार्थ ने शर्करा नियंत्रण के उपाय बताए। नियमित दिनचर्या और सामान्य भोजन को स्वस्थ रहने की कंजी करार दिया। बताया कि मधुमेहियों में नेत्र ही नहीं अन्य शारीरिक विकार तेजी से होते हैं।
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डॉ. कंवलजीत सिंह ने रेटिनोपैथी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रक्त शर्करा बढ़ने से खराब हुई आंखों के इलाज के लिए नई तकनीक से उपचार संभव हैं। यहां क्षेत्रीय नेत्र संस्थान (एमडीआई) में सभी तरह की आंखों की बीमारी का इलाज किया जा रहा है।
फाउंडेशन की सचिव डॉ. सरिता बजाज ने प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह समेत अन्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने मधुमेह के साथ हार्मोन्स प्रबंधन और नियंत्रण के बारे में अपने अनुभव बताए। उप सचिव डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने इस मौके पर आए मरीजों के परीक्षण में जानकारियों को साझा किया। कहा कि महिलाओं में मधुमेह ही नहीं थायराइड की समस्या ज्यादा सामने आ रही है। संचालन मुख्य समन्वयक डॉ. शांति चौधरी ने किया। इस मौके पर सैकड़ों मरीजों के रक्त शर्करा की नि:शुल्क जांच की गई। कार्यक्रम में अश्विनी बजाज, अजय कुमार, राजेश चौधरी, आशीष गुप्ता, विमलेश समेत वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।
आंखों में बार-बार बिलनी मतलब मोतियाबिंद का खतरा
सीएमई में बीएचयू से आए डॉ. ओमप्रकाश ने मधुमेह के मरीजों में होने वाली आंख की बीमारियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहाकि जिन मरीजों में बार-बार बिलनी ( स्टाई) हो जाती है तो ऐसे मरीजों को मोतियाबिंद और काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) कम उम्र में ही हो सकता है।
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