प्रयागराज। कृषि कानून और किसान आंदोलनों का असर दिखने लगा है। इस बार एक नवंबर के बजाय 15 अक्तूबर से ही धान की खरीद शुरू हो जाएगी। इतना ही नहीं इस बार मंडियों को भी धान खरीदने की अनुमति दी गई है। माना जा रहा है कि खुला बाजार होने के बाद मंडियों पर दबाव कम हो गया है। ऐसे में धान खरीद के रूप में उन्हें नया काम मिला है। इसके अलावा इस फैसले को किसानों की नाराजगी दूर करने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।
लॉकडाउन में आने वाले प्रवासी श्रमिकों ने भी खेती में हाथ आजमाया। इसकी वजह से धान का रकबा बढ़ने के साथ समय से खेती भी हो गई। इसके अलावा मौसम भी अनुकूल रहा। ऐसे में इस बार अधिक उत्पादन के साथ जल्दी पैदावार होने की उम्मीद है। इसे देखते हुए धान की खरीद की तैयारी शुरू कर दी गई है। शासन ने इस बार 16 दिन पहले से ही धान खरीद शुरू करने का आदेश दिया है। फिलहाल 50 क्रय केंद्र खोले जाएंगे।
धान की कटाई जोर पकड़ने के बाद 143 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। चूंकि नए विधेयक के बाद कृषि उत्पाद के लिए बाजार खुल गया है। ऐसे में मंडियों में दबाव कम होने की बात कही जा रही है। इसके मद्देनजर मंडी समिति को भी क्रय केंद्र खोलने की अनुमति दी गई है। हालांकि, अभी समिति की ओर से किसी भी मंडी में क्रय केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी विपिन राय का कहना है कि समिति की ओर से प्रस्ताव आता है तो मंडियों में भी क्रय खोले जाएंगे। बताया कि 15 अक्तूबर से क्रय केंद्र चालू हो जाएंगे। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
खरीद पर रखी जाएगी ऑनलाइन निगरानी
धान खरीद या तौल में गड़बड़ी से संबंधित शिकायतों में इस बार कमी के दावे किए जा रहे हैं। धान की ढुलाई करने वाले ट्रकों के अलावा गोदामों तथा क्रय केंद्रों की जीयो टैगिंग की जा रही है। गोदाम की जीयो टैगिंग हो चुकी है। 35 क्रय केंद्रों भी लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से जुड़ गए हैं। अन्य की भी जीयो टैगिंग की जा रही है। इसकी मदद से धान खरीद की पूरी प्रक्रिया पर ऑनलाइन निगरानी रखी जा सकेगी।