वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम का तर्क था कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश 26 अगस्त 2015, 3 मार्च 2015, 5 नवंबर 2014 एवं 21 जुलाई 2011 के तहत वे सभी अग्निशमन अधिकारी जिन्होंने विभाग में 16 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें उनके द्वारा की गई प्रशिक्षण अवधि को जोड़ते हुए द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान 5400 चीफ फायर ऑफिसर के पद का दिया जाना चाहिए। कहा गया था कि याची सातवें वेतन आयोग का लाभ भी पाने के हकदार हैं।
बहस की गई कि लालबाबू शुक्ला के प्रकरण में कोर्ट द्वारा प्रतिपादित किए गए विधि सिद्धांत के अनुसार याचीगण की प्रशिक्षण की अवधि उनकी सेवाओं में जोड़ी जानी चाहिए तथा चीफ फायर ऑफिसर के पद का ग्रेड पे 5400 दिया जाए। मामले के अनुसार सभी याचियों की सेवाएं 16 वर्ष से ज्यादा की थी। हाईकोर्ट ने डीजी फायर सर्विस को निर्देश दिया है कि वह तीन माह के अंदर उन सभी फायर स्टेशन ऑंफीसर्स की जिन्होंने 16 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली है उनके प्रशिक्षण अवधि को सेवा में जोड़कर द्वितीय प्रोन्नत वेतनमान 5400 ग्रेड पे दिए जाने को लेकर नियमानुसार आदेश पारित करें।