पावों में थकावट तो दूर तक नहीं थी। पूरे जोश और उमंग के साथ घाट पहुंचे। जयकारे के साथ पूरा संगम नोज गुंजायमान हो रहा था। श्रद्धालुजन बड़े आस्था भाव के साथ अक्षत, पुष्प अर्पण कर वंदन पूजन करने में लीन रहे। संगम तट पर अपने परिवार के साथ भक्तों ने मनोकामना की पूर्ति के लिए आशीष मांगा।
गरीबों को दान करने की भी होड़ मची रही। कोई संतों के शिविरों में दान कर पुण्य कमा रहा था तो कोई गरीबों को अन्न वस्त्र देकर अपने पूर्व जन्म के लिए पुण्य बटोर रहा था। लाखों की तादाद में श्रद्धालु पौष पूर्णिमा स्नान के लिए संगम तट पर डेरा डाल दिए हैं।