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आ अब लौट चलें: पुण्य की गठरी के साथ पिपिया में भरा गंगाजल, कल्पवासी चले घर; 15 को महाशिवरात्रि का अंतिम स्नान

Mon, 02 Feb 2026 11:40 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पुण्य की गठरी के साथ पिपिया में गंगाजल भरकर कल्पवासी घर वापसी करने लगे हैं। मकर संक्रांति के दिन मेला आए कल्पवासी त्रिजटा स्नान के बाद घर लौटेंगे। 15 को महाशिवरात्रि का अंतिम स्नान पर्व है।
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संगम स्नान के बाद सामान समेट कर घर को जाते कल्पवासी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रयागराज में माघ मेले के पांचवें स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर कल्पवास का संकल्प पूरा करने के लिए गंगा-त्रिवेणी संगम स्नान किया। पुण्य की डुबकी लगाकर कल्पवासी रविवार से ही रेणुका प्रसाद ले विदा होने लगे। स्नान करने वाले श्रद्धालु पुण्य की गठरी समेटे पिपिया में गंगाजल भरकर घर वापसी करते रहे। 
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वहीं, मकर संक्रांति से मेला क्षेत्र में आए श्रद्धालु सोमवार को परीवा तिथि की वजह से मेले में रुकेंगे। त्रिजटा स्नान कर तीन फरवरी से वापसी करेंगे। मेले का अंतिम स्नान पर्व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का होगा।

रविवार को सूर्योदय पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:05 बजे पूर्णिमा तिथि संचरण होने के साथ संगम तीरे हर-हर गंगे, माधव सकल काम साधो के जयघोष से आरंभ स्नान रात तक चलता रहा। ज्योतिषियों के मुताबिक पूर्णिमा का मान रात में 3:46 बजे तक रहेगा। इस दौरान सभी 24 घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। लोगों ने पूजन-अर्चन के साथ दीपदान भी किया।
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विदा हो रहे कल्पवासियों ने किया साष्टांग प्रणाम
संगम की रेती पर एक माह के कल्पवास के बाद रविवार को जब विदाई की बेला आई तो बारह बरस पर कल्पवास पूर्णता का भंडारा करने वाले भावुक हो गए। वहीं, अन्य कल्पवासियों ने मां गंगा की गोद से जाने से पहले साष्टांग प्रणाम किया। तकिया पाटन जिला उन्नाव की गुलाबो ने सुबकते हुए कहा तीन महीने आने की तैयारी में लगे। एक महीना कैसे बीता पता ही नहीं चला। गंगा मइया से प्रार्थना है कि अगले साल भी अपनी गोदी में कल्पवास करने की शक्ति दें।

शिविरों में विसर्जित की जौ की बाली और ले गए तुलसी का बिरवा
कल्पवासियों ने शिविर के बाहर बोई गई जौ की बालियां गंगा में विसर्जित कर दीं। कुछ लोग कुछ बालियां घर ले गए हैं। वहीं, तुलसी का पूजन-अर्चन कर लोग परंपरानुसार तुलसी का बिरवा घर ले गए वहीं कुछ ने गंगा में विसर्जित कर दिया।
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संत भी शिविरों से मठों होंगे रवाना
माघ मेला क्षेत्र में संतों के शिविरों और पंडालों में अभी तक भजन-कीर्तन, प्रवचन, हवन, श्रीमद्भागवत और रामचरितमानस की गूंज थी। कहीं राम तो कहीं भागवत कथा में श्रद्धालु जुटते रहे। अब माधी पूर्णिमा स्नान के बाद अब संत-महात्मा भी अगले माघ मास में मिलने के वादे के साथ संगम की रेती से विदा लेकर मठों के लिए रवाना होंगे।
 
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