सेंथल। मुहर्रम पर चल रहे अजादारी के सिलसिले में मंगलवार को अकीदतमंदों ने हजरत अली असगर की शहादत को याद कर आंसू बहाए। देर रात तक इमामबाड़ों में मजलिसों मातम का सिलसिला चलता रहा। मजलिसों में छह माह के हजरत अली असगर के मसाएब बयान किए गए। जुलुस-ए-अलम उठे और शबीहे गहवारे की जियारत कराई गई। महिलाओं ने भी अपने-अपने घरों पर मजलिस कर हजरत अली असगर के नौहे पढ़े।
मजलिसों का सिलसिला सुबह जफर अब्बास के आवास से शुरू हुआ जो देर रात इमामबाड़ा कला पर समाप्त हुआ। इमामबाड़ा कला में आयोजित मजलिस को फैजाबाद से आए मौलाना हुसैन मेहंदी ने खिताब कर किया। मजलिस के बाद अंजुमन असगरिया ने नौहाख्वानी कर शबीहे गहवारे की जियारत कराई। इमामबाड़ा काजमैन में भी अंजुमन पंजेतनी ने नौहा पढ़ गहवारे की जियारत कराई। दोपहर दो बजे इमामबाड़ा खुर्द से अलम और डोले का जुलूस निकाला गया। जो अपने तय मार्ग से होता हुआ देर रात इमामबाड़ा खुर्द पर समाप्त हो गया। इसमें शाजान जैदी, आबिस हसनैन, शारिक हसनैन, मीसम जैदी, अहसन जैदी आदि ने मर्सियख्वानी की। वहीं दूसरा जुलूस अंजुमन असगरिया के नेतृत्व में कब्रिस्तान से उठा जो इमामबाड़ा कला पर जाकर समाप्त हुआ। इसमें अल्वी जैदी, फरोग जैदी, अरमान हुसैन, महजर जैदी, महवर अब्बास आदि मौजूद रहे।