विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत कुंभ क्षेत्र के सेक्टर 13 में आयोजित देवकीनंदर ठाकुर की कथा के चौथे दिन पूर्णिमा के स्नान की महत्ता को। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वे सौभाग्यशाली है कि उन्हें संगम की पवित्र भूमि पर आकर गंगा स्नान का लाभ प्राप्त हो रहा है।
देवकीनंदन ने कहा कि जिनके कर्म श्रेष्ट होते है वो संसार को सुंदर बनाते है। उनका कहना है कि विचार वो होते है, जो अपने साथ दूसरों के भी काम आ सकें। उस सुंदरता का कोई मोल नहीं जिनमें उदारता और श्रेष्ठता न हो। बीच उन्होंने भजन भी श्रद्धालुओं को सुनाकर भाव विह्वल किया।
अरे मन मुसाफिर तुझको निकलना पड़ेगा, किराये का घर खाली करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि धर्म को लेकर श्रद्धालुओं के मन में जो भी कामना है, चाहे वह पुण्य कार्य करने की हो या दान देने की। कुंभ से बड़ा अवसर और स्थान कोई नहीं हो सकता है। यहां कि ए हुए धर्म का लाभ सामान्य दिनों से लाख गुना ज्यादा मिलेगा।
उन्होंने समझाया कि लोगों को सिर्फ अपना तन ही सुन्दर नहीं रखना चाहिए, अपने मन और विचारों को भी सुन्दर बनाना चाहिए। जिनके कर्म श्रेष्ट होते है वो संसार को सुंदर बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते है। इसीलिए उस सौंदर्य का कोई मोल नहीं है अगर उनके विचारों में उदारता और श्रेष्ठता न हो। इसलिए हमें कभी भी अपनी सुंदरता पर घमंड नहीं करना चाहिये।
अगर घमंड करना ही है तो इस बात पर करें की आपको ठाकुर ने मानव जीवन दिया है, इस मानव जीवन में सुन्दर विचारों के साथ हमको आगे बढऩा चाहिए। देवकीनंदन ने बताया कि वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारों में पांचवां अवतार और मानव रूप में अवतार था।
जिसमें भगवान विष्णु ने एक वामन के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर भगवान कृष्ण की बाललीला, गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग का वृतांत सुनाया जाएगा।