अखाड़ों की तर्ज पर अब गृहस्थ श्रद्धालुओं को लेकर शंकराचार्य सेवा मंडल का गठन किया गया है। सेवा मंडल के माध्यम से वैश्विक परिदृश्य पर सनातन धर्म के मूल स्वरूप को जन-जन तक पहुंचाने के लिए शास्त्र और युद्ध क्रिया में पारंगत लोगो का समूह तैयार होगा। इसका वैश्विक स्तर से लेकर गांव-गांव तक सेवा मंडल का विस्तार किया जाएगा। यह फैसला पौष पूर्णिमा के अवसर पर शंकराचार्य ट्रस्ट के शिविर में आयोजित बैठक में लिया गया।
शंकराचार्य ट्रस्ट के अध्यक्ष शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने बताया कि अखाड़ों की तरह संगठन का निश्चित गणवेश होगा। जो भी सेवा मंडल का कार्यकर्ता होगा उसके हाथ में चार फिट का दंड होगा जो चारो वेदों में दीक्षित और चारो वेदों को समर्पित होगा। आनंद स्वरूप महाराज ने बताया कि संगठन के विस्तार के क्रम में सेवामंडल का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख श्रीनाथ तिवारी को मनोनीत किया गया । उन्होंने बताया कि शंकराचार्य सेवा मंडल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता केवल गृहस्थ होंगे।
सरकारी कर्मचारी भी सेवा मंडल के कार्यकर्ता बन सकते हैं । आनंद स्वरूप ने बताया कि सेवा मंडल गांव-गांव जाकर सनातन धर्म के मूल स्वरूप के बारे में लोगो को बताएगा। कुत्सित जाति व्यवस्था के बारे में लोगो को जागरूक करेगा। उन्होंने कहा कि आदर्श चतुर्वण व्यवस्था जो कर्म के आधार पर स्थापित है, उसे समृद्ध करने का कार्य करना चाहिए।
बताया कि देश भर के प्रत्येक जिले और ग्राम सभा स्तर पर सेवा मंडल की इकाइयों का गठन होगा। इसके जरिए सनातन संस्कृति की रक्षा और जाति व्यवस्था को खतम कर सभी एक है, सभी मानव है, इस व्यवस्था को स्थापित करने का काम किया जाएगा। बैठक में ट्रस्ट के समस्त पदाधिकारी उपस्थित थे।