फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : समन जारी करने के स्तर पर नहीं किया जा सकता साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन, अपील खारिज

Fri, 30 Oct 2026 09:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समन जारी करने के स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन या मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता। इस स्तर पर प्रथम दृष्टया अपराध के होने या नहीं होने के बिंदु पर विचार किया जाता है।
विज्ञापन
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समन जारी करने के स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन या मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता। इस स्तर पर प्रथम दृष्टया अपराध के होने या नहीं होने के बिंदु पर विचार किया जाता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने सोनभद्र की एससी-एसटी एक्ट की विशेष न्यायाधीश की ओर से जारी संज्ञान और समन आदेश को चुनौती देने वाली शिव शंकर गुप्ता की याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन


मामला सोनभद्र के शक्तिनगर थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता लाल चंद्र भारती ने शिव शंकर गुप्ता और राधेश्याम गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता अपने भाई के साथ उपभोक्ता सेवा केंद्र पर रुपये निकालने गया था। वहां विवाद के दौरान अपीलकर्ता ने गाली-गलौज करते हुए जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। दोनों भाइयों के साथ मारपीट कर उन्हें चोट पहुंचाई।अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि रुपये निकालने को लेकर हुए विवाद के कारण उसे झूठा फंसाया गया है।

एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। यह भी कहा गया कि विवेचना के दौरान सीसीटीवी फुटेज और कथित चश्मदीद गवाहों के बयानों पर ध्यान नहीं दिया गया। बचाव पक्ष के अनुसार, उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया अपराध नहीं बनता। वहीं, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अपील का विरोध किया। कहा कि एफआईआर और विवेचना के दौरान जुटाई गई सामग्री से प्रथम दृष्टया मामला बनता है।आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
विज्ञापन


कोर्ट ने एफआईआर और घायलों के बयानों का उल्लेख किया। कहा कि अपीलकर्ता पर चोट पहुंचाने और जातिसूचक गालियां देने के आरोप लगाए गए हैं। घायलों के बयानों को मेडिकल साक्ष्य डॉक्टर की गवाही से समर्थित है। लिहाजा, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन जारी करने के स्तर पर साक्ष्यों की विश्वसनीयता का विस्तृत परीक्षण करना या मुकदमे की तरह सभी तथ्यों का मूल्यांकन करना आवश्यक नहीं है। इस स्तर पर यह देखना पर्याप्त है कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया अपराध बनता है या नहीं। इसी आधार पर कोर्ट ने आपराधिक अपील खारिज कर दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट का संज्ञान एवं समन आदेश बरकरार रखा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें