टीजीटी (शारीरिक शिक्षा) परीक्षा रद्द करने, घोषित परिणाम पर रोक लगाने तथा पुनरीक्षित परिणाम घोषित करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार व चयनित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है ।
याची का कहना है कि चयन के प्रत्येक चरण मे आरक्षण दिया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का खुला उल्लंघन है।
प्रयागराज के विमल तिवारी और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति वीके बिडला सुनवाई कर रहे हैं।
याचिका पर अधिवक्ता प्रतीक चंद्रा ने बहस करते हुए बताया कि याची लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद साक्षात्कार में शामिल हुआ और जब अंतिम परिणाम घोषित किया गया तो याची का नाम चयन सूची में नहीं था।याची को पता चला है कि लिखित परीक्षा, साक्षात्कार व अंतिम चयन सूची तैयार करने, तीनों स्तरों पर आरक्षण लागू किया गया है, जो विधि विरुद्ध है। याचिका में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को परिणाम पुनरीक्षित कर याची की नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश जारी किए जाने की मांग की गई है।