इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सपा नेता और रामपुर के सांसद मो. आजम खां पर जौहर विश्वविद्यालय के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति का घोटाला करने के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामलेे की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई है।
कोर्ट ने आजम खां पर लगाए गए आरोपों के बाबत जानकारी मांगी है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठा रही है। इसे लेकर दाखिल रामपुर के फैसल खां लाला की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि आजम खां ने जौहर विवि के नाम से प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाई है। इसमें विभिन्न विभागों की लगभग 88 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। जौहर ट्रस्ट के नाम से आजम खां ने निजी ट्रस्ट बना लिया है, जिसके नौ सदस्यों में से पांच उनके परिवार के लोग ही हैं। जबकि, चार अन्य उनके विश्वासपात्र लोग हैं।
ट्रस्ट के नाम पर कब्जा की सार्वजनिक संपत्ति का निजी फायदे में इस्तेमाल हो रहा है। सपा सरकार में मंत्री रहने के दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों की संपत्तियों से विश्वविद्यालय को फायदा पहुंचाया है।
रीब किसानों की भी सैकड़ों बीघा जमीन कब्जा कर ली गई। इस मामले में डीएम और कमिश्नर की रिपोर्ट में उच्च स्तरीय जांच की संस्तुति की गई है। कोर्ट ने जानना चाहा कि इसी मामले में आजम खां के खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
इस पर याची के अधिवक्ता का कहना था की प्राथमिकी एक आपराधिक मामला है, जबकि पब्लिक प्रॉपर्टी का दुरुपयोग करना अलग मामला है। जिसकी की बड़े स्तर पर जांच किए जाने की आवश्यकता है। याचिका पर 29 जनवरी को अगली सुनवाई होगी।