मंदी की मार झेल रही बीयर कंपनियों ने हालात को देखते हुए बीयर केदाम नहीं बढ़ाए। इस वर्ष मार्च महीने से ही गर्मी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया था। वहीं कोरोना के मामले भी न के बराबर रहे, जिससे बीयर की मांग बढ़ गई। आंकड़ाें पर नजर डालें तो बीयर के शौकीनों ने शराब की खपत को तीसरे पायदान पर पहुंचा दिया है। अंग्रेजी शराब की मौजूदा मांग 22.2 फीसदी, देशी शराब 34.4 फीसदी तो बीयर की मांग 60 फीसदी है, जो लगभग दोगुने के अंतर को दर्शाता है।
दो वर्षो में बीयर की बिक्री
वर्ष 2020-21 में देशी शराब की खपत 1 करोड़ 10 लाख 55 हजार 585 बल्क लीटर थी, जो 2021-22 में बढ़कर 1 करोड़ 48 लाख 61 हजार 980 हो गई। इस दौरान 34 फीसदी की वृद्घि दर्ज की गई। वर्ष 2020-21 में अंग्रेजी शराब की 750 एमएल की 73 लाख 49 हजार 604 बोतल बिकीं जो 2021-22 में 22 फीसदी वृद्धि के साथ 89 लाख 84 हजार 57 बोतल पहुंच गई। इसके अलावा बीयर में पिछले वर्ष केमुकाबले रिकार्ड 60 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2020-21 में 500 एमएल की 1 करोड़ 89 हजार 62 हजार 46 कैन बिकीं, 2021-22 में 1 करोड़ 73 लाख 89 हजार 252 कुल कैन बेची गईं।
कोरोना केदौरान बीयर की मांग देशी शराब और अंग्रेजी शराब की तुलना में कम थी। लेकिन इस वर्ष कोरोना केमामले भी कम हैं और गर्मी भी ज्यादा पड़ रही है, इसलिए बीयर की मांग पहले से दोगुनी बढ़ी है। - एके सिंह, अपर आयुक्त, आबकारी विभाग
जहां तक अल्कोहल की बात की जाए तो वह कहीं से भी ठीक नहीं है। बीयर को लेकर तमाम तरह की बातें होती है कि बीयर फायदेमंद है। लेकिन बीयर एडिक्शन को बढ़ावा देती है। - डॉ. अजय मिश्रा, मनोचिकित्सक परामर्शदाता