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High Court : देहुली नरसंहार...44 साल पुराने मामले में दो की मौत की सजा उम्रकैद में बदली, एक बरी

Thu, 11 Sep 2025 07:16 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court :इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 44 साल पुराने देहुली नरसंहार मामले में दो दोषियों रामसेवक और कप्तान सिंह की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। इसके साथ ही एक अन्य दोषी रामपाल सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 44 साल पुराने देहुली नरसंहार मामले में दो दोषियों रामसेवक और कप्तान सिंह की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। इसके साथ ही एक अन्य दोषी रामपाल सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह व न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की खंडपीठ ने दिया।

मैनपुरी के जसराना थाना क्षेत्र के देहुली गांव में 1981 में हुए नरसंहार में 24 लोगों की मौत और छह लोग घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में रामसेवक, कप्तान सिंह और रामपाल सिंह सहित 17 लोगों को आरोपी बनाया गया था। ट्रायल कोर्ट में मुकदमा लंबित रहने के दौरान रामपाल, कप्तान व रामसेवक को छोड़कर सभी की मृत्यु हो गई। विशेष न्यायाधीश (डकैती प्रभावित क्षेत्र) ने तीनों को दोषी करार देते हुए 18 मार्च 2025 के आदेश से फांसी की सजा सुनाई। तीनों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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24 लोगों की हुई थी हत्या 

याची अधिवक्ता विष्णु मूर्ति त्रिपाठी, अधिवक्ता शिवानी कुलश्रेष्ठ ने दलील दी कि तीनों आरोपी निर्दोष हैं। इनका घटना से पहले या घटना के बाद कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इन्हें सिर्फ मुख्य आरोपियों के पारिवारिक सदस्य का होने की वजह से इस मामले में फंसाया गया है। वहीं, राज्य के अधिवक्ता ने इन दलीलों का विरोध किया। दलील दी कि नरसंहार की घटना में सभी शामिल थे। 24 लोगों की नृशंस हत्या की गई। ऐसे में तीनों आरोपी किसी भी रहम के पात्र नहीं है।

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खंडपीठ ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दोषियों की उम्र काफी ज्यादा हो चुकी है और इस मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने में दशकों लग गए जो कि एक निंदनीय तथ्य है। 44 साल बाद मृत्युदंड देना न्याय के हित में नहीं होगा। यह कहते हुए कोर्ट ने रामसेवक और कप्तान सिंह की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और तीसरे आरोपी रामपाल सिंह को दोषमुक्त कर दिया।

देहुली नरसंहार में 24 लोगों को गोली मार कर हुई थी हत्या

अभियोजन के अनुसार नवंबर 1981 में मैनपुरी के जसराना थाना क्षेत्र के देहुली गांव में 24 लोगों की नृशंस हत्या की गई थी। लायक सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि रामसेवक, कप्तान व रामपाल सहित 17 लोगों ने बंदूख व राइफलों से लैस होकर देहुली गांव पर हमला कर दिया और लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। इसमें 24 लोगों की जान चली गई। दर्जनभर लोग घायल हुए। शिकायतकर्ता का कहना था कि घटना से साल भर पहले राधे और संतोष सिंह एक पुलिस मुठभेड़ में शामिल थे और दोनों भाग निकले। इसके बाद देहुली गांव के जाटव समाज के कुछ लोग पुलिस के गवाह बन गए। इसी नाराज होकर आरोपियों ने इस घटना को अंजाम दिया।

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