अंत में, यह तर्क दिया गया कि अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है, याची जनवरी 2021 से जेल में है। मुकदमे के शीघ्र समापन की कोई संभावना नहीं है। दूसरी ओर, राज्य की ओर से उपस्थित सरकारी अधिवक्ता ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि विचाराधीन मोबाइल नंबर स्वर्गीय विकास दुबे के नौकर का है और विकास दुबे को भागने में सहायता करने के लिए आवेदक द्वारा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।
यह भी तर्क दिया गया कि दया शंकर अग्निहोत्री के बयान के आधार पर विशेष जांच दल द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी और चूंकि दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के नियम ग्राहक के परिवर्तन की अनुमति नहीं देते हैं। इसलिए , आवेदक जमानत पर छोड़ें जाने का हकदार नहीं है।