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Allahabad High Court : पूर्व गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म केस वापसी पर फैसला सुरक्षित

Sat, 30 Jul 2022 12:30 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने याची स्वामी चिन्मयानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार, सरकारी वकील  को सुनने के बाद शुक्रवार को दिया। राज्य सरकार ने अभियोजन वापसी की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
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स्वामी चिन्मयानंद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद स्वामी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा वापस लेने के मामले में फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरक्षित कर लिया। युवती ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ शाहजहांपुर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया।

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यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने याची स्वामी चिन्मयानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार, सरकारी वकील  को सुनने के बाद शुक्रवार को दिया। राज्य सरकार ने अभियोजन वापसी की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।


मामले के अनुसार राज्य सरकार ने अभियोजन वापसी की दरख्वास्त दी थी, जिसे निचली अदालत शाहजहांपुर ने खारिज कर दिया था। पीड़ित युवती ने स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ शाहजहांपुर में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध इसी अपराध में आरोप पत्र दाखिल किया। हाईकोर्ट से स्वामी चिन्मयानंद को गिरफ्तारी पर स्थगनादेश मिल गया। बाद में सरकार ने स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध इस आपराधिक मामले में अभियोजन वापसी की दरख्वास्त दी, जो खारिज हो गई।

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स्वामी चिन्मयानंद - फोटो : अमर उजाला
पीड़िता के पति के अधिवक्ता संदीप शुक्ल ने कहा कि पीड़िता ने मुकदमे में बाद में स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के पक्ष में जवाबी हलफनामा दाखिल किया। पीड़िता ने मुकदमे में अपने पति के खिलाफ भी कई आरोप लगाए थे।
 
 
एडवोकेट शुक्ल ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका जिसमें सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण की मांग की गई है। उसमें बिंदु उठाया गया कि विभिन्न सरकारें राजनीतिक फायदे के लिए तमाम विधायकों एवं सांसदों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को सीआरपीसी की धारा 321 की शक्तियों का उपयोग करते हुए वापस ले रही हैं।
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