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Prayagraj: अतीक के दो नाबालिग बेटों को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर फैसला सुरक्षित, शाइस्ता ने कही ये बात

Thu, 23 Mar 2023 10:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता बेगम की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। शाइस्ता की ओर से कहा गया कि उनके दोनों अवयस्क बच्चों को 24 फरवरी 2023 को अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया है।
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अतीक अहमद और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता बेगम की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। शाइस्ता की ओर से कहा गया कि उनके दोनों अवयस्क बच्चों को 24 फरवरी 2023 को अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया है। दोनों किशोरों को लेकर पुलिस कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति वीके बिड़ला तथा न्यायमूर्ति सत्येन्द्र सिंह की खंडपीठ कर रही है।

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अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पोषणीयता पर आपत्ति की। कहा इसी मामले में धारा 97 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी इलाहाबाद के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है जो लंबित है। ऐसी दशा में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पोषणीय नहीं है। याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस मिश्र का कहना है कि याचिका में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि दोनों अवयस्क बच्चों को 24 फरवरी 2023 को अवैध रूप से गिरफ्तार कर निरुद्ध किया गया है।

उनके नागरिक आजादी और प्राणों को गंभीर संकट है। ऐसी दशा में उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाय। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रयागराज के आदेश के बावजूद अब तक पुलिस ने यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी कि बच्चे कहां है। कहा गया कि बाल सुधार गृह में रखा गया है किंतु खुल्दाबाद एवं कसारी मंसारी में स्थित बाल सुधार गृहों के अधीक्षकों द्वारा कहा गया है कि उनके यहां दोनों लड़के बंद नहीं हैं।
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तर्क प्रस्तुत किया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका जीवन के अधिकार की याचिका है। विवेक की याचिका नहीं है। अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी भी व्यक्ति की नागरिक की दैहिक एवं प्राणों की स्वतंत्रता को विधिक प्रक्रिया के प्रतिकूल वंचित नहीं किया जा सकता है। इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पोषणीय है।

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