हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई अन्य लोगों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने के मामले में अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। गोरखपुर के रसीद खां ने अपर सत्र न्यायाधीश गोरखपुर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अपर सत्र न्यायाधीश ने मुकदमा चलाने की अनुमति देने संबंधी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया था। याचिका पर न्यायमूर्ति वीके नारायण ने सुनवाई की।
महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने याचिका पर आपत्ति करते हुए कहा कि पुलिस की रिपोर्ट दाखिल हो जाने के बाद इस मामले में याचिका दाखिल करने की अधिकारिता नहीं है। याचिका पोषणीय न होने के कारण खारिज की जाए। याची के अधिवक्ता एसएफए नकवी का कहना था कि शिकायतकर्ता को अभियोजन की कार्यवाही को चुनौती देने का अधिकार है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बातों के समर्थन में सुप्रीमकोर्ट के कई न्यायिक निर्णय भी दिए। पक्षकारों को सुनने के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित कर लिया है।
प्रकरण 2007 के गोरखपुर दंगे से संबंधित है। दंगे के दौरान एक मजार को क्षतिग्रस्त करने के मामले में योगी आदित्यनाथ सहित अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मजिस्ट्रेट ने इस पर संज्ञान लेते हुए आरोपी गणों को समन जारी कर दिया। समन आदेश को एक आरोपी महेश खेमका ने अपर सत्र न्यायालय में चुनौती दी। अपर सत्र न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।