हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और अन्य लोगों के खिलाफ 2007 के गोरखपुर दंगे के मामले में दर्ज मुकदमे की जांच स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की मांग पर निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में योगी पर गोरखपुर के कैंट थाने में मुकदमा दर्ज है। याचिका पर न्यायमूर्ति रमेेश सिन्हा और न्यायमूर्ति केपी सिंह की पीठ ने सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया।
गोरखपुर के मो. परवाज, परवेज और अशद हयात की याचिका में कहा गया है कि 2007 में गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। दंगा भड़काने के लिए याचीगण ने आदित्यनाथ योगी, राधामोहन अग्रवाल और अंजू चौधरी आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए अधीनस्थ न्यायालय में 156 (3) के तहत अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में निगरानी दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने अवर न्यायालय के आदेश को गलत मानते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के आदेश पर कैंट थाने में आदित्यनाथ योगी सहित अन्य अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में सरकार ने मुकदमे की जांच सीबीसीआईडी को स्थानांतरित कर दी। याचीगण ने पुन: याचिका दाखिल कर कहा है कि उनको सीबीसीआईडी की जांच पर भरोसा नहीं है। सीबीसीआईडी ने जांच लंबे समय से लटका रखी है तथा कुछ नहीं किया। इसलिए मामले की जांच किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए। कोर्ट ने पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया है।