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कर्ज माफी योजना किसानों से धोखा

Sat, 07 Oct 2017 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से दो अक्तूबर को चंपारण से शुरू किसान मुक्ति यात्रा शुक्रवार को इलाहाबाद पहुंची। इस दौरान हुई सभा तथा अन्य कार्यक्रमों में किसान नेताओं ने केंद्र और प्रदेश पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया तो प्रदेश में ऋण मोचन योजना को भी किसानों के साथ धोखा बताया। पूर्ण ऋण मुक्ति और लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य लागू करने की मांग को लेकर उन्होंने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की। इसी क्रम में उन्होंने 20 नवंबर को यात्रा के समापन पर दिल्ली में रामलीला मैदान में 10 लाख से अधिक किसानों के जमावड़े का दावा किया। घूरपुर में आयोजित सभा में बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए। नेताओं ने दावा किया कि यात्रा में 180 किसान संगठन के लोग शामिल हो रहे हैं।
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सभा से पहले सिविल लाइंस में हुई प्रेसवार्ता में यात्रा के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि मनसौर में आंदोलनरत किसानों पर हमला हुआ, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले ऋण मुक्ति तथा डेढ़ गुना समर्थन मूल्य करने की घोषणा की थी कि लेकिन सरकार बनने के बाद वह पीछे हट गए। खेती में बहुत बदलाव हो रहा है। सरकार की गलत नीतियाें की वजह से ठेकेदारी खेती शुरू हो रही है। राशन प्रणाली पर हमला हो रहा है। कई मुद्दे हैं जिन्हें लेकर किसान ठगा हुआ महसूस कर रहा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर देश भर के किसानों को एकजुट करने के उद्देश्य से यह यात्रा शुरू की गई है। कहा कि पीएम ने वादा किया था तो उसे निभाना भी चाहिए था। अब किसान उन वादों का हिसाब मांगेगे। वीएम सिंह ने मोदी सरकार की ओर से न्यायालय में स्वामीनाथन आयोग पर अमल नहीं किया जा सकता, का हलफनामा देने की भी निंदा की। उन्होंने बताया कि 20 राज्यों में भ्रमण, सभाओं के बाद यात्रा 20 नवंबर को दिल्ली पहुंचेगी।

समिति के महासचिव डॉ. आशीष मित्तल ने कहा कि प्रदेश सरकार का कर्जमाफी किसानों के साथ धोखा है। चुनाव से पहले सभी का कर्ज माफ करने की घोषणा की गई थी लेकिन बड़े तबके को बाहर कर दिया गया। इनमें भी ज्यादातर के एक-दो रुपये माफ हुए हैं। दिल्ली में किसानाें का जमावड़ा होगा। बिना हक लिए किसान वहां से नहीं हटेंगे। वहीं पर किसान संसद का गठन किया जाएगा। स्वाभिमान के शेतकारी संगठन के सांसद राजू शेट्ठी, स्वराज अभियान के अखिलेंद्र प्रताप सिंह, राजस्थान के रामपाल आदि ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर किसानों को धोखा देने का आरोप लगाया और बड़े आंदोलन की घोषणा की।
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 इसमे घूरपुर में आयोजित सभा में किसान नेताओं ने ये मुद्दे उठाए और बड़े आंदोलन के लिए किसानों-मजदूरों सेे तैयार रहने की अपील की। इसी क्रम में शाम को हुई बैठक में कृषि नीति, विश्व व्यापार संगठन की शर्तों और खेती की रक्षा पर चर्चा हुई और कई प्रस्ताव पारित किए गए।

स्वाभिमान शेतकारी संगठन के सांसद राजू शेट्ठी का कहना है किसानों के हक के लिए वह एनडीए से अलग हुए। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने किसानों का पूरा कर्ज माफ करने तथा फसल का डेढ़ गुना मूल्य करने का आश्वासन दिया था लेकिन तीन साल में किसानों का उत्पीड़न और बढ़ गया। सरकार ने वादा पूरा नहीं किया। इसलिए उन्होंने एनडीए से खुद को अलग कर लिया। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने स्पष्ट किया कि यह मंच राजनीति के लिए नहीं है। सिर्फ किसानों की हक की लड़ाई के लिए इसका गठन किया गया है, जिसमें 180 संगठन शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि  इसमें शामिल संगठन अलग-अलग मंच से राजनीति में शामिल हैं, वे करते रहेंगे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीतिक विकल्प की बात हो सकती है लेकिन इस मंच के माध्यम से नहीं।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की किसान मुक्ति यात्रा का घूरपुर में जबरदस्त स्वागत हुआ। यात्रा के तहत आयोजित सभा में जुटे किसानों और मजदूरों ने अपना दर्द बयां करने के साथ एकजुटता भी दिखाई। दूर दराज गांवों से बड़ी संख्या में लोग जुलूस की शक्ल में सभा में पहुंचे। इनमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी दिखी। यात्रा शनिवार को लखनऊ में होगी। किसान मुक्ति यात्रा के संयोजक वीएम सिंह ने जनसभा में उपस्थित महिलाओं से सीधे संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा कि ‘इस सरकार ने उपज का उचित मूल्य न देकर किसान-मजदूरों की मजदूरी मारी है। समय आ गया है कि अब अपने एक-एक पाई का हिसाब लिया जाय।’ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव आशीष मित्तल ने यात्रा के बारे में जानकारी दी और किसान नेताओं का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 20 नवंबर को देश भर से दस लाख से अधिक किसान जुटेंगे।

बात न सुनी गई तो वे कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने बताया कि सभा में योगेंद्र यादव को भी शामिल होना था लेकिन वह नहीं आ पाए। उन्होंने संदेश भेजकर किसानों से एकजुटता की अपील की है। सभा में सांसद राजू शेट्ठी ने महाराष्ट्र में गन्ना किसानों के संघर्ष का जिक्र करते हुए एकजुटता की अपील की। इसी क्रम में अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि देश में बदलाव का दौर चल रहा है। पहले सड़क पर कहीं भी मछली, मुर्गा, बकरे आदि का मीट खरीदी जा सकता था लेकिन अब बूचड़खानों से खरीदना होगा। उन्होंने कहा कि सड़क, खेती, उद्योगों की अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है। देश पर तानाशाही की तलवार लटक रही है। अब भी न चेते तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। सभा को ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा, रामपाल जाट, अखिल भारतीय क्षेत्र किसान संगठन के बेचन अली, अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल सिंह, प्रेम सिंह अहलावत, सुरेश निषाद, रामकैलाश आदि ने संबोधित किया। सभा का संचालन अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश सचिव हीरालाल ने किया।

जनसभा में स्थानीय प्रतिनिधियों ने बालू खनन में लूट, अवैध वसूली, पुलिसिया उत्पीड़न के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। परंपरागत रोजगार छिनने उनमें जबरदस्त रोष दिखा। किसान-मजदूर प्रतिनिधियों का कहना था कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से नाव के सहारे जीवन यापन कर रहे हजारों निषाद परिवार भुखमरी के कगार पर पहुुंच गये हैं। जबकि, मशीनों से बालू निकालने, रवन्ना बेचने और अवैध वसूली करने वाले लोग मालामाल हो रहे हैं। अंधाधुंध बालू खनन से नदियों में पारिस्थितिक परिवर्तन भी हो रहा है। कछार के किसानों के खेत रौंदें जा रहे हैं जिसके चलते खीरा, ककड़ी, नेनुआ, तरबूज आदि की खेती करने वाले किसान मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। तमाम लोगों ने अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दी है।
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