इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट से मिली फांसी की सजा को पलटते हुए आरोपी विनोद पासी को बरी कर दिया है। कहा कि अभियोजन के गवाह भरोसेमंद नहीं थे और जांच में ऐसी गंभीर कमी रही।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट से मिली फांसी की सजा को पलटते हुए आरोपी विनोद पासी को बरी कर दिया है। कहा कि अभियोजन के गवाह भरोसेमंद नहीं थे और जांच में ऐसी गंभीर कमी रही। मृतका के शरीर से लिए गए नमूनों का आरोपी के शरीर से लिए गए नमूनों से मिलान नहीं कराया गया। ऐसे कमजोर साक्ष्य पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है। मामला 20 अप्रैल 2012 को प्रयागराज के नवाबगंज थाना क्षेत्र में सात वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या से जुड़ा था। मामले में अपर विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने 15 मई 2025 को विनोद पासी को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में फांसी की सजा की पुष्टि के लिए संदर्भ और आरोपी की ओर से अपील दाखिल की गई।
हाईकोर्ट ने अभियोजन के प्रमुख गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाया। प्रथम सूचनादाता ने एफआईआर में आरोपी को बच्ची को ले जाते हुए देखने की बात स्पष्ट रूप से नहीं कही थी। जबकि अदालत में उसने दावा किया कि उसने आरोपी को बच्ची को बिस्कुट का लालच देकर ले जाते हुए देखा था। कोर्ट ने गवाहों के विरोधाभास को महत्वपूर्ण माना।