इलाहाबाद। दुनिया भर में कुख्यात मौत के खेल ‘ब्लू व्हेल’ ने शहर में भी दस्तक दे दी है। शहर में कई लोग इस आत्मघाती गेम के शिकंजे में फंसे हैं। मुंडेरा इलाके में रहने वाले नगर निगम के एक अधिकारी के बेटा ने भी इस जानलेवा सुसाइड चैलेंज गेम में फंसकर अपनी बाइक तेज रफ्तार में खंभे से भिड़ा दी, उसका सिर फटा, पैर की हड्डी टूटी मगर साथ ही परिजनों को इस खेल के बारे में पता चल गया तो उसकी जान बच गई। इस बारे में पड़ोसियों को भी जानकारी मिली लेकिन निगम अफसर ने पुलिस में लिखित शिकायत नहीं की बल्कि एक परिचित अधिकारी से सलाह ली। खबर है कि कई और छात्र इस गेम के खतरनाक टास्क पूरे करने के चक्कर में ऊलजलूल हरकत करने लगे तो परिवार के लोगों ने किसी तरह उन्हें रोका गया। अब अभिभावक घबराए हैं कि कहीं उनके बच्चे न इस फेर में फंस जाएं।
ब्लू व्हेल कोई एप्लीकेशन, साफ्टवेयर या वीडियो गेम नहीं है। इसे कहीं से डाउनलोड नहीं किया जा सकता है। यह ऐसा खेल है जिसमें कोई एडमिनिस्ट्रेटर व्हाट्स एप, गूगल, फेसबुक, इंस्ट्राग्राम जैसे सोशल साइट्स पर सक्रिय शख्स से लिंक के जरिए संपर्क करता है। इस खेल में शामिल होने वाले व्यक्ति को 50 टास्क पूरे करने होते हैं। हर रोज एक टास्क। 50वां टास्क खुद अपनी जान लेने का होता है। टास्क भी अजीब और खतरनाक। जैसे-भोर में चार बजे जगकर डरावनी फिल्म देखना, विदेशी म्यूजिक सुनना, अपने भाई, दोस्त या पालतू जानवर को बुरी तरह पीटना, ब्लेड से हाथ पर कट करना, हाथ या पेट पर चीरकर ब्लू व्हेल बनाना, बाइक या कार तेज रफ्तार में खंभे या डिवाइडर से टकराना, बहुमंजिला छत या पुल की रेलिंग पर कुछ देर के लिए खड़े होना।
आखिरी यानी 50 वां टास्क आत्महत्या का होता है। खेल में शामिल शख्स को हर टास्क में फोटो खींचकर एडमिनिस्ट्रेटर को भेजनी होती है। कोई इस खतरनाक खेल से अलग होना चाहता है तो उसे परिवार सहित खत्म करने की धमकी दी जाती है। इस खेल की शुरूआत चार साल पहले रूस से हुई थी। पिछले साल कई छात्रों की मौत का मामला सामने आनेे पर खेल के सूत्रधार फ्लिप बुडेकिन को गिरफ्तार किया गया था। 22 साल के फ्लिप ने बाद में गुनाह कुबूलते हुए कहा कि उसने उन लोगों को शिकार बनाया जो समाज के लिए कचरा थे और उसने सफाई का काम किया। भारत सरकार ने इस खेल पर रोक लगाने के लिए गूगल, फेसबुक समेत सभी सोशल साइट्स को लिंक डिलीट करने को कहा है।
खतरनाक ब्लू व्हेल गेम के बारे में मीडिया के जरिए अब ज्यादातर लोगों को पता चल चुका है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.सौरभ टंडन कहते हैं कि यह एक तरह का जुनूनी और आत्मघाती खेल है। इसके चक्रव्यूह में फंसने वाले लोग खतरनाक टास्क पूरा करने के चक्कर में ऊलजलूल हरकतें करने लगते हैं। टास्क नहीं पूरा कर पाने पर मिलने वाले धमकियां के चलते वे तनाव में डूब जाते हैं। ऐसे में जरूरत इस बात कि है कि अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। अगर लगता है कि वे इस खेल के शिकंजे में फंसे हैं तो फौरन उसके फोन या कंप्यूटर से लिंक डिलीट कर दें। एक-दो दिन बच्चा उग्र हरकत कर सकता है फिर सामान्य हो जाएगा। अगर तब भी बात नहीं बनती तो उसे मनोरोग विशेषज्ञ के पास काउंसलिंग की खातिर ले जाएं ताकि उसके मन से डर दूर किया जा सके।
‘फिलहाल इलाहाबाद में ब्लू व्हेल खेल के किसी पीड़ित ने लिखित शिकायत नहीं की है। ऐसी कोई घटना नहीं सामने आई है जिसके पीछे ब्लू व्हेल खेल हो। संभव है कि यहां भी इस खेल में फंसे लोग हों। शिकायत मिलने पर कुछ किया जा सकता है। सलाह है कि लोग सोशल साइट पर ब्लू व्हेल का लिंक न क्लिक करें।’
-ब्रजेश मिश्रा, एसपी क्राइम