पिता बोले- बेटे को फर्जी फंसाया
उधर शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे पिता चंद्रमणि ने मांडा थाने की पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने विवाहिता की हत्या नहीं की थी। बल्कि उसके परिवार के ही लोगों ने उसे मारा। विवाहिता के भाई सत्यदेव ने ससुराल पक्ष के पांच लोगों के खिलाफ हत्या का केस भी दर्ज कराया। मांडा पुलिस ने पहले विवाहिता के ससुरालियों को हिरासत में लिया। उसके बाद उन सभी को छोड़कर 20 सितंबर को उसके बेटे को उठा लिया। वह कारण पूछने थाने गए तो बताया कि विवाहिता की हत्या के मामले मेें पूछताछ के लिए लाए हैं।
यह भी बताया कि वह हर रोज बेटे को खाना देने जाते थे। उधर मांडा थाना इंस्पेक्टर संजय संधू ने बताया कि पुलिस पर लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं। विवेचना में नीरज के खिलाफ विवाहिता के हत्या का सबूत मिला, जिसमें विधिक कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेजा गया था। इस मामले में प्रभारी जेल अधीक्षक राम सिंह यादव ने बताया कि जब वह जेल में आया था, उसी समय उसे पेट दर्द और उल्टी हो रही थी। जेल अस्पताल में भर्ती किया गया था। राहत न मिलने पर एसआरएन भेज दिया गया था।
दारागंज घाट पर हुआ शव का अंतिम संस्कार
नीरज के शव का शुक्रवार को दोपहर बाद वीडियोग्राफी के बीच तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर पर कोई भी चोट के निशान नहीं मिले हैं। डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित रखा है।
अंतिम संस्कार करा दिया गया है। परिजनों ने न्यायिक जांच की मांग की है। इस संबंध में उचित कार्रवाई की जाएगी। विधिक प्रक्रिया के अनुसार जल्द ही जांच की जाएगी। -अभिनव त्यागी,डीसीपी यमुनानगर